Pakistan Occupied Kashmir : इफ्तिखार अली गिलानी ने POK के 17वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के नेता गिलानी को विधानसभा में हुए चुनाव में 44 में से 30 वोट मिले. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार फिर POK की राजनीति और कश्मीर मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
कौन हैं इफ्तिखार अली गिलानी?
इफ्तिखार अली गिलानी पेशे से बैरिस्टर और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) से जुड़े नेता हैं. हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्हें POK की सत्ता की कमान मिली है.पीएम बनने के बाद उनके सामने क्षेत्र की राजनीतिक अस्थिरता और जनता के बीच बढ़ते असंतोष जैसी कई चुनौतियां हैं.
कैसे बने POK के प्रधानमंत्री?
POK विधानसभा में प्रधानमंत्री पद के लिए हुए चुनाव में इफ्तिखार गिलानी को 44 में से 30 सदस्यों का समर्थन मिला. इस तरह उन्होंने बहुमत हासिल कर प्रधानमंत्री पद अपने नाम कर लिया. इसके बाद उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.
अपनी सीट नहीं जीत पाए थे गिलानी
इफ्तिखार गिलानी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उनकी विधानसभा में एंट्री को लेकर उठ रहे हैं. उनके आलोचकों का दावा है कि गिलानी अपनी सामान्य विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीत पाए थे. इसके बाद उन्हें टेक्नोक्रेट कोटे के जरिए विधानसभा में पहुंचाया गया.
प्रधानमंत्री बनते ही भारत और कश्मीर पर बयान
पद संभालने के बाद इफ्तिखार अली गिलानी ने भारत और कश्मीर मुद्दे पर भी बयान दिया. उन्होंने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की पारंपरिक राजनीतिक लाइन को दोहराया. उनके बयान के बाद भारत-पाकिस्तान और POK से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और तेज हो गई है.
क्यों चर्चा में हैं इफ्तिखार गिलानी?
इफ्तिखार गिलानी का नाम इस समय इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह ऐसे समय POK के प्रधानमंत्री बने हैं, जब वहां राजनीतिक असंतोष और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 30 वोट हासिल कर प्रधानमंत्री बनने के बाद अब उनकी सरकार के सामने जनता का भरोसा जीतने और राजनीतिक विवादों को खत्म करने की बड़ी चुनौती होगी.
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