US Tariff Collection: यूएस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका अब टैरिफ के एक बड़े हिस्से की वसूली अब बंद करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ्स को अवैध ठहराया. US कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने कहा कि टैरिफ की वसूली मंगलवार तड़के 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से बंद कर दी जाएगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 के कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत दुनिया भर के तमाम देशों पर टैरिफ लगाए थे. इस फैसले ने वैश्विक सप्लाई चेन में उथल पुथल मच गई थी और अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों में तनाव पैदा किया था. हालांकि, अब इस विवादास्पद व्यापारिक हथियार पर व्यापक रोक लग गई है.
यह रोक सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के तीन दिन से अधिक समय बाद लगाई गई है. हालांकि, सीबीपी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अंतरिम अवधि में टैरिफ की वसूली क्यों जारी रखी गई और न ही यह बताया कि आयातकों को भुगतान की गई राशि वापस की जाएगी या नहीं. यह निलंबन केवल IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होगा. ट्रंप शासनकाल के अन्य शुल्क, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सेक्शन 232 के तहत और अनुचित व्यापार प्रथाओं से जुड़े सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ इससे प्रभावित नहीं होंगे. एजेंसी ने कहा, ‘सीबीपी व्यापार समुदाय को आवश्यकतानुसार सीएसएमएस संदेशों के जरिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करेगा.’
ट्रंप ने फिर लगा दिया 15% ग्लोबल टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही इन टैरिफ्स को रद्द कर दिया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी जगह एक अलग कानूनी प्रावधान के तहत 15 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी. फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने सभी देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर एक समान टैरिफ लगाने की घोषणा की पहले इसे 10 प्रतिशत बताया गया और फिर अचानक बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. इससे संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कानूनी और वित्तीय असर जारी रखने के लिए अमेरिकी व्यापार नीति में तेजी से बदलाव किया जा रहा है.
नए शुल्क अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 122 पर आधारित हैं. इस प्रावधान के तहत 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन 150 दिनों तक ही. इससे अधिक समय तक लागू रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है. अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने सेक्शन 122 का इस्तेमाल नहीं किया है और इस पर कानूनी चुनौतियां तय मानी जा रही हैं.
अमेरिका को वापस करना पड़ सकता है 175 अरब डॉलर
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ आदेश वाले फैसले के चलते अमेरिका को 175 अरब डॉलर से अधिक का रिफंड करना पड़ सकता है. 20 फरवरी को 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने IEEPA का गलत इस्तेमाल किया. उन्होंने टैरिफ लगाते समय अपने अधिकारों से आगे बढ़कर काम किया. अदालत ने माना कि यह कानून उन्हें ऐसे अधिकार नहीं देता. यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, जिसकी ट्रंप ने अनुमति नहीं ली थी.
ये भी पढ़ें:- ट्रंप के मार-ए-लागो रिजॉर्ट में घुसा हथियारबंद हमलावर, सीक्रेट सर्विस ने किया ढेर
ये भी पढ़ें:- क्या है नेतन्याहू का ‘Hexagon’ प्लान? PM मोदी के साथ मिलकर बना रहे ‘महा-चक्रव्यूह’
