अमेरिका में रूस के खिलाफ एक नया और सख्त प्रतिबंध बिल तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें भारत और चीन को मुख्य निशाना बनाया गया है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने कहा कि यह बिल खास तौर पर उन देशों पर दबाव बनाने के लिए तैयार किया गया है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीद रहे हैं. उनके अनुसार, भारत और चीन रूस की आय का सबसे बड़ा स्रोत बने हुए हैं.
100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान, भारत पर बढ़ सकता है दबाव
प्रस्तावित 'लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' में प्रावधान है कि रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा खरीदने वाले देशों के आयातित सामान पर अमेरिका 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है. बिल का उद्देश्य रूस की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक ताकत को कमजोर करना बताया गया है.
इस बिल की धारा 113 के तहत उन पांच देशों को निशाना बनाया गया है जो रूस से सबसे अधिक तेल और गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में उसकी मदद करते हैं. इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है. यदि यह कानून बनता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
सीनेट में बड़ी बढ़त, लेकिन अभी बाकी है अंतिम मंजूरी
अमेरिकी सीनेट ने इस बिल पर बहस सीमित करने के प्रस्ताव (क्लोटर) को 86-12 मतों से मंजूरी दे दी है. इससे बिल के अंतिम मतदान का रास्ता आसान हो गया है. हालांकि, प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसे कुछ विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जहां कई सांसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्तियां देने के पक्ष में नहीं हैं.
यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी वैश्विक सियासी गर्मी
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर रूस पर और कड़े कदम उठाने की मांग की. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिकी कांग्रेस इस बिल को अंतिम मंजूरी देती है या नहीं और इसका भारत समेत वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ता है.
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