US Marines: यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने इस जहाज को रोकने से पहले करीब 6 घंटे तक बार-बार चेतावनी दी थी. जब जहाज ने बात नहीं मानी, तो गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘यूएसएस स्प्रुआंस’ (USS Spruance) ने पहले जहाज के इंजन सिस्टम को निशाना बनाकर उसे बेकार कर दिया.
इसके बाद मरीन कमांडो हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे जहाज पर उतरे और उसे अपने कंट्रोल में ले लिया. सेंटकॉम यानी यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड अमेरिकी सेना का वह हिस्सा है, जो मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) और मध्य एशिया के देशों में सुरक्षा और सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान
इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी कि ईरानी जहाज अब पूरी तरह से अमेरिकी मरीन के कब्जे में है और उसकी तलाशी ली जा रही है. ट्रंप ने दावा किया कि इस जहाज पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने पहले से ही प्रतिबंध लगा रखे थे क्योंकि यह जहाज अवैध गतिविधियों में शामिल रहा है. उन्होंने बताया कि ओमान की खाड़ी में बार-बार चेतावनी नजरअंदाज करने के बाद यह एक्शन लिया गया है.
क्यों शुरू हुआ यह समुद्री विवाद?
दरअसल, इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचे बिना खत्म हो गई थी. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी करने का आदेश दे दिया. यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे जरूरी माना जाता है. अमेरिका ने पिछले हफ्ते साफ कर दिया था कि जो भी जहाज ईरान से आएगा या वहां जाएगा, उसे ब्लॉक किया जाएगा. अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि ईरान से जुड़ा कोई भी जहाज अगर अरब सागर की तरफ बढ़ेगा, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा.
ईरान ने दी जवाबी हमले की चेतावनी
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके सैन्य प्रवक्ता ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है. ईरान के हजरत खातम अल-अंबिया मिलिट्री हेडक्वार्टर ने एक बयान जारी कर कहा कि यह जहाज चीन से आ रहा था और अमेरिकी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान की सेना इस कार्रवाई का जल्द ही मुंहतोड़ जवाब देगी.
तेल की कीमतों पर संकट का डर
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा फ्री में नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि एक तरफ ईरान के तेल एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगाई जा रही है और दूसरी तरफ हमसे सुरक्षा की उम्मीद की जा रही है, यह नहीं चलेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर दबाव जारी रहा, तो इसका असर पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट और तेल की कीमतों पर पड़ेगा.
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बातचीत में धोखे का आरोप
ईरानी न्यायिक एजेंसी ‘मीजान’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की है. पेजेश्कियान का कहना है कि अमेरिका बातचीत और सीजफायर के दौरान गलत व्यवहार कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस रवैये से ईरानी अधिकारियों के मन में शक पैदा हो गया है कि अमेरिका कूटनीति के मामले में फिर से धोखा दे सकता है.
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