जल्द समाप्त नहीं होगा ईरान युद्ध! ट्रंप के वित्त मंत्री बोले- US के पास इसके लिए बहुत पैसा है

US Iran War Funding: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच गया है. इस दौरान अमेरिका को काफी नुकसान हुआ है और उसका खर्च बढ़ता जा रहा है. इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने यूएस कांग्रेस से अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है. हालांकि ट्रंप के वित्त मंत्री ने कहा कि हमें इस युद्ध में फंडिंग की कोई कमी नहीं है.

US Iran War Funding: ईरान के खिलाफ अमेरिका का युद्ध महंगा होता जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार पहले दो सप्ताह में ही अमेरिका का केवल नुकसान ही 7500 करोड़ डॉलर हो गया है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध अब चार हफ्ते बाद भी जारी है. यह संघर्ष केवल सैन्य ताकत का नहीं बल्कि अमेरिकी सरकार की आर्थिक क्षमता के लिए भी एक लिटमस टेस्ट (कसौटी) बनता जा रहा है. हालांकि, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को जारी रखने के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त संसाधन हैं, जबकि इसी दौरान ट्रंप प्रशासन कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग करने की तैयारी भी कर रहा है. 

एनबीसी न्यूज के मीट द प्रेस कार्यक्रम में बेसेंट ने प्रशासन की हालिया कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा कि ट्रंप ने अपने कानूनी अधिकारों के तहत यह कदम उठाया. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संघर्ष से निपटने के लिए ‘सभी विकल्प खुले रखे हुए’ हैं. उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने वॉर पावर्स एक्ट के तहत अपने अधिकारों के भीतर रहते हुए यह कार्रवाई शुरू की है. हमारे पास इस युद्ध को फंड करने के लिए पर्याप्त पैसा है. जो अतिरिक्त फंड मांगा जा रहा है, वह केवल पूरक (सप्लीमेंटल) है, न कि तत्काल जरूरत.’

लेकिन इसके लिए पैसा कहां से आएगा? पहले टैरिफ (आयात शुल्क) से मिलने वाली आय पर निर्भरता अब उतनी प्रभावी नहीं मानी जा रही, जिससे यह सवाल और गहरा गया है कि सरकार भविष्य के खर्चों को कैसे पूरा करेगी. सुने बेसेंट ने क्या कहा?

  • NBC के न्यूज एंकर वेलकर ने बेसेंट से पूछा: क्या सरकार इस युद्ध के लिए टैक्स बढ़ा सकती है?
  • तो बेसेंट ने कहा: यह सवाल गलत तरीके से पेश किया गया है.
  • वेलकर: यह एक सीधा सवाल है.
  • बेसेंट: यह बेकार सवाल है.
  • वेलकर: क्या आप इसका जवाब देंगे?
  • बेसेंट: हम ऐसा क्यों करेंगे? हमारे पास पर्याप्त पैसा है.

टैक्स नहीं बढ़ेगा- बेसेंट

बेसेंट ने लोगों को आश्वस्त किया कि इस युद्ध के कारण टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा और इस चिंता को खारिज किया कि इसका बोझ आम अमेरिकी नागरिकों पर डाला जाएगा, भले ही पेंटागन ने अधिक फंडिंग की जरूरत के संकेत दिए हों. बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी सरकार आर्थिक रूप से इस युद्ध को जारी रखने में सक्षम है.

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अतिरिक्त पैसा आखिर आएगा कहां से. उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन सेना की तैयारी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है और ट्रंप ने हमेशा रक्षा क्षमताओं को प्राथमिकता दी है. 

उन्होंने कहा,  ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल की तरह इस बार भी सेना को मजबूत किया है और वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आगे भी सेना के पास पर्याप्त संसाधन हों.’ उनके अनुसार, प्रशासन यह नहीं चाहता कि संघर्ष के जारी रहने या और बढ़ने की स्थिति में उपकरण या संसाधनों की कोई कमी हो.

200 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग

इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उनका प्रशासन ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच पेंटागन के लिए लगभग 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग कर सकता है. उन्होंने इसे यह सुनिश्चित करने के लिए ‘छोटी कीमत’ बताया कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार रहे.

ओवल ऑफिस से गुरुवार को बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि यह फंडिंग अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखने में मदद करेगी. उन्होंने यह भी खारिज किया कि अमेरिका को हथियारों की कोई कमी हो रही है और कहा कि प्रशासन सैन्य संसाधनों का ‘सावधानीपूर्वक’ उपयोग कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘हम कई कारणों से यह मांग कर रहे हैं, सिर्फ ईरान ही नहीं… खासकर गोला-बारूद के मामले में हमारे पास काफी है, लेकिन हम उसे सुरक्षित रख रहे हैं.’ 

अमेरिका का महंगा युद्ध अभियान

शुरुआती अनुमान बताते हैं कि यह संघर्ष हाल के दशकों में अमेरिका के सबसे महंगे सैन्य अभियानों में से एक बनता जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती चरण में ही कुछ दिनों के भीतर अरबों डॉलर खर्च हो गए थे. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को इस युद्ध के पहले दो हफ्तों में ही करीब 800 मिलियन डॉलर यानी लगभग करीब 75 अरब 20 करोड़)का नुकसान हो चुका है. उसने ईरान के खिलाफ बेतहाशा मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन हमले किए हैं. इसमें अमेरिका के कई जहाज गिरे भी हैं. इसके साथ ही अब तक लगभग 13 सैनिकों की भी मौत हो चुकी है. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने फिर से 200 बिलियन डॉलर फंडिंग की मांग की है. 

US कांग्रेस में विरोध के संकेत

अतिरिक्त फंडिंग का प्रस्ताव को कांग्रेस में विरोध का सामना कर रहा है. दोनों पार्टियों के सांसद इस नई मांग पर सवाल उठा रहे हैं. सीनियर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं ने कहा है कि किसी भी नए खर्च को मंजूरी देने से पहले वे और अधिक जानकारी चाहते हैं. कुछ का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की जरूरत पर सवाल उठता है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी है कि एक और बड़े युद्ध का दीर्घकालिक आर्थिक असर गंभीर हो सकता है.

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पेंटागन ब्रीफिंग में यूएस रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह मांग तेहरान के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत जारी सैन्य अभियानों से जुड़ी है. हेगसेथ ने कहा,  ‘जहां तक 200 अरब डॉलर की बात है, यह आंकड़ा बदल सकता है. बुरे लोगों को खत्म करने के लिए पैसा लगता है.’ 

ईरान युद्ध की वजह से तेल बाजार में हाहाकार

28 फरवरी को 86 वर्षीय ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत के बाद हुई थी. इसके बाद ही ईरान युद्ध 2026 शुरू हो गया. ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्गों में बाधा आई और वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है, जबकि नैचुरल गैस के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं.

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इस क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण ईरान ने लगभग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लगभग 20 प्रतिशत यातायात का मार्ग है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसका असर भी दिखने लगा है. तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा हुआ है.अमेरिकी नागरिक भी पेट्रोल पंप पर इसका असर महसूस कर रहे हैं. इससे प्रशासन पर युद्ध और उसके खर्च को सही ठहराने का दबाव बढ़ गया है.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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