US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य आर्थिक सलाहकार केविन हासेट ने जानकारी दी है कि 28 फरवरी से शुरू हुए मिडिल ईस्ट संघर्ष में अमेरिका अब तक करीब 12 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. हासेट के अनुसार, यह पैसा मुख्य रूप से बम, मिसाइल, विमान उड़ाने, नौसेना की तैनाती, खुफिया जानकारी जुटाने और लॉजिस्टिक्स जैसे सीधे सैन्य खर्चों पर हुआ है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह लड़ाई लंबी खिंची, तो अमेरिका पर इसका बोझ 40 से 95 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए है बड़ा खतरा?
केविन हासेट का कहना है कि यह युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है. उन्होंने सीबीएस न्यूज के शो ‘फेस द नेशन’ में बताया कि ऊर्जा बाजार अभी यह मानकर चल रहा है कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा, इसलिए तेल की कीमतें गिर रही हैं. हासेट ने यह भी साफ किया कि 1970 के दशक के मुकाबले आज अमेरिका खुद एक बड़ा तेल उत्पादक देश बन चुका है, इसलिए हमारे पास तेल की कमी नहीं है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ईरान की हरकतों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों का आना-जाना रुकता है, तो हासेट के मुताबिक इसका नुकसान उन देशों को सबसे ज्यादा होगा जो वहां के तेल पर निर्भर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो अप्रत्यक्ष खर्च बढ़ जाएंगे. इनमें तेल की बढ़ती कीमतें, जहाजों का महंगा बीमा, व्यापार के रास्तों का बंद होना और युद्ध के बाद रक्षा भंडारों को फिर से भरने की लागत शामिल है.
फंड की कमी और सरकार की तैयारी
जब हासेट से पूछा गया कि क्या सरकार युद्ध के लिए कांग्रेस से और पैसों की मांग करेगी, तो उन्होंने कहा कि अभी फिलहाल जो संसाधन हैं, वे काफी हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस के अंदर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि सरकार जल्द ही युद्ध के लिए करीब 50 अरब डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग कर सकती है. हासेट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बजट प्रबंधन कार्यालय (OMB) और रस वॉट इस पर विचार करेंगे.
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जंग का असर
युद्ध की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हमले अब और तेज हो सकते हैं. आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,444 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, अमेरिका को भी बड़ा नुकसान हुआ है, जिसमें 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 140 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं. लड़ाई अब लेबनान तक फैल चुकी है और ईरान लगातार खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है.
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