अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में व्हाइट हाउस में ईरान के साथ संभावित समझौते पर अहम बैठक हुई, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद ट्रंप बिना किसी निर्णय के बाहर निकल गए. इससे अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है. इस अहम बैठक से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ कहा था कि युद्धविराम बढ़ाने वाले किसी भी समझौते में ईरान को संघर्ष से प्रभावित होर्मुज दोबारा खोलना होगा. ट्रंप ने इसे समझौते की सबसे अहम शर्तों में से एक बताया था.
कौन सी शर्त ईरान को माननी ही होगी?
ट्रंप ने यह भी साफ कहा था कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को यह भरोसा देना होगा कि वह कभी परमाणु बम नहीं बनाएगा. साथ ही, अमेरिका की प्रमुख शर्तों में यह भी शामिल था कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को हटाने या अमेरिका को उसे नष्ट करने की अनुमति दे. वॉशिंगटन इन शर्तों को समझौते के लिए बेहद अहम मान रहा है.
ईरान लगातार इन शर्तों का विरोध करता रहा है. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति तभी किसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जब उसमें उनकी सभी प्रमुख शर्तें शामिल हों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी रोक लगे.
60 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है युद्धविराम को
खबर के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते के तहत मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है, ताकि इस दौरान ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत हो सके. व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई अहम बैठक से पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा था कि वह ईरान को लेकर “अंतिम फैसला” लेने जा रहे हैं. हालांकि बैठक के बाद भी किसी समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी.
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ट्रंप ने कहा कि ईरान को साफ तौर पर यह मानना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार या परमाणु बम नहीं बनाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए तुरंत खोला जाना चाहिए और समुद्र में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों को हटाया या नष्ट किया जाना चाहिए.
