अमेरिका ने शनिवार (27 जून) को ईरान पर एक और सैन्य हमला किया. यह कार्रवाई उस समय हुई जब होर्मुज के पास पनामा के झंडे वाले एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया. दो हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच शांति समझौता हुआ था, लेकिन इस ताजा घटना के बाद तनाव फिर बढ़ गया है और हालात दोबारा बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका की यह कार्रवाई लगातार दूसरे दिन हुई सैन्य कार्रवाई है, जो क्षेत्र में कमर्शियल शिप पर हुए हमलों से जुड़ी बताई जा रही है.
ताजा हमलों पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सेना के सुप्रीम कमांडर के निर्देश पर की गई. अमेरिका का दावा है कि ईरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, जिसके जवाब में ये सैन्य हमले किए गए. CENTCOM ने इसे सीजफायर उल्लंघन पर सीधी प्रतिक्रिया बताया और कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा तथा समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए यह कदम उठाया गया.
CENTCOM ने क्या कहा ताजा हमले को लेकर
CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि एम/वी एवर लवली पर हुए कथित ईरानी हमले के जवाब में अमेरिका ने शुक्रवार को कार्रवाई की थी और इसके बाद ईरान को युद्धविराम समझौते का पालन करने का मौका दिया गया था. लेकिन अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने ऐसा नहीं किया. CENTCOM के मुताबिक, शनिवार सुबह 4:30 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरानी बलों ने एक आत्मघाती ड्रोन हमला किया, जिसमें एम/टी किकू नामक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया. पनामा के झंडे वाला यह टैंकर होर्मुज के पास से गुजर रहा था और उसमें 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था.
ईरानी मीडिया ने क्या दावा किया?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि दक्षिणी ईरान के सीरिक द्वीप पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. यह इलाका होर्मुज के बेहद करीब है और शुक्रवार को भी यहां हमला हुआ था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना के कई प्रोजेक्टाइल केश्म द्वीप के एक गांव को भी निशाना बनाकर दागे गए. हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या हताहतों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
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ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी
ताजा अमेरिकी हमलों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान अपनी उकसावे वाली कार्रवाइयां जारी रखता है, तो अमेरिका को आगे भी सैन्य कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता और उसके शासन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
