यूक्रेन के 'स्काई मैप' से सजेगा सऊदी अरब का रक्षा कवच, ईरानी ड्रोन हमलों पर अमेरिका का तगड़ा प्रहार

US Deploys Ukraine Sky Map: सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर अमेरिका ने यूक्रेन की खास एंटी-ड्रोन तकनीक 'स्काई मैप' को तैनात कर दिया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम का इस्तेमाल ईरानी ड्रोनों को पहचानने और उन्हें हवा में ही गिराने के लिए किया जा रहा है.

US Deploys Ukraine Sky Map: खास बात यह है कि इस तकनीक को चलाने के लिए यूक्रेनी एक्सपर्ट्स खुद अमेरिकी सैनिकों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. यह वही सिस्टम है जिसने रूस-यूक्रेन जंग में ईरानी ‘शाहेद’ ड्रोनों को नाकाम करने में बड़ी सफलता हासिल की है.

हमलों के बाद लिया गया फैसला

यह कदम प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद उठाया गया है. ईरान से करीब 400 मील दूर स्थित इस बेस पर हुए हमलों में अमेरिकी बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा था और एक अमेरिकी सर्विस मेंबर की जान भी चली गई थी. रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका अब यूक्रेन की उस काबिलियत का फायदा उठा रहा है जिसे उसने युद्ध के मैदान में परखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सस्ते और भारी तादाद में आने वाले ड्रोनों को रोकने में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम में जो कमियां थीं, उन्हें अब यह यूक्रेनी तकनीक पूरा करेगी.

पेंटागन भी अब एंटी-ड्रोन बजट बढ़ा रहा है

कुछ हफ्ते पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को ईरानी ड्रोनों से निपटने के लिए यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है. लेकिन रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि हकीकत इसके उलट है. यूक्रेनी एक्सपर्ट्स अब सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों में मौजूद हैं और वहां की सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर रहे हैं. पेंटागन भी अब एंटी-ड्रोन बजट बढ़ा रहा है ताकि बेहतर सेंसर और इंटरसेप्टर तैयार किए जा सकें, क्योंकि अधिकारियों ने माना है कि ड्रोन के बदलते खतरों से निपटने के लिए कोई एक सिस्टम काफी नहीं है.

जेलेंस्की ने जताई हथियारों की कमी पर चिंता

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव यूक्रेन की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका में उत्पादन कम होने की वजह से उन्हें पहले ही बहुत कम एंटी-मिसाइल सिस्टम मिले हैं. अगर मिडिल ईस्ट में जंग लंबी खिंचती है, तो यूक्रेन को मिलने वाले रक्षा पैकेज और हथियारों की सप्लाई रुक सकती है. उन्होंने बताया कि यूक्रेन ‘PURL’ प्रोग्राम के जरिए नाटो देशों की मदद से पैट्रियट मिसाइलें खरीद रहा है, जो उनके लिए बेहद जरूरी हैं.

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यूक्रेन बांट रहा है अपना अनुभव

जेलेंस्की ने साफ किया कि पिछले चार सालों से रूसी और ईरानी ड्रोनों का सामना करने के बाद यूक्रेन के पास अब जबरदस्त अनुभव है. उन्होंने सीएनएन से कहा कि यूक्रेन ने सऊदी अरब, कतर और यूएई के साथ समझौते किए हैं. इसके तहत यूक्रेन इन देशों को न सिर्फ अपनी तकनीक और रणनीतिक जानकारी दे रहा है, बल्कि वहां ट्रेनिंग मिशन भी चला रहा है. जेलेंस्की का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में जल्द ही सीजफायर नहीं हुआ, तो यूक्रेन के लिए एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलें हासिल करना और भी मुश्किल हो जाएगा.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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