अमेरिका में 1.15 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बिल पास, बदलेगा डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस का नाम

अमेरिकी संसद के निचले सदन ने 1.15 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा नीति विधेयक पास कर दिया है, जिसमें रक्षा विभाग का नाम बदलकर 'डिपार्टमेंट ऑफ वॉर' करने की प्रमुख सिफारिश है. जानिए इस बिल के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में.

US Defense Bill 2026 : अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने काफी बहस और राजनीतिक खींचतान के बाद 1.15 ट्रिलियन डॉलर (करीब 96 लाख करोड़ रुपये) का रक्षा नीति विधेयक नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) पास कर दिया है. इस बिल में ट्रंप प्रशासन के कई बड़े प्रस्ताव शामिल हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी रक्षा विभाग का नाम बदलकर 'डिपार्टमेंट ऑफ वॉर' करने की सिफारिश की हो रही है.

216-212 वोटों से पास हुआ बिल

इस अहम बिल पर वोटिंग के दौरान दोनों दलों में मतभेद भी देखने को मिले. बिल 216 के मुकाबले 212 वोटों से पास हुआ. 6 डेमोक्रेट सांसदों ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर रिपब्लिकन का साथ दिया, जबकि 7 रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी ही पार्टी के बिल के खिलाफ वोट किया. डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप सरकार की ईरान नीति और विदेशों में चल रहे सैन्य अभियानों का हवाला देकर बिल का विरोध किया.

रक्षा विभाग का नाम बदलने की सिफारिश

बिल में कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जिन्हें ट्रंप समर्थकों की प्राथमिकता माना जा रहा है. सबसे बड़ा प्रस्ताव रक्षा विभाग का नाम बदलकर 'अमेरिका का युद्ध विभाग' (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) करने का है. इसके अलावा सैनिकों को सैन्य ठिकानों पर अपने निजी हथियार रखने की अनुमति देने और ट्रंप के चुनावी एजेंडे से जुड़े 'सेव अमेरिका एक्ट' को भी इसमें शामिल किया गया है.

सैनिकों की सैलरी बढ़ाने का भी प्रावधान

इस बिल में अमेरिकी सैनिकों की सैलरी 5 से 7 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही पेंटागन के लिए हथियारों और नई सैन्य तकनीक की खरीद प्रक्रिया को तेज करने की भी व्यवस्था की गई है, ताकि सेना को आधुनिक संसाधन जल्दी मिल सकें.

अब सीनेट की मंजूरी बाकी

हालांकि, प्रतिनिधि सभा से पास होने के बाद भी यह बिल अभी कानून नहीं बना है. अब इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया जाएगा, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रभाव ज्यादा है. माना जा रहा है कि ईरान नीति और रक्षा बजट जैसे मुद्दों पर डेमोक्रेट्स इस बिल का विरोध कर सकते हैं. ऐसे में मिडटर्म चुनाव से पहले इसका कानून बनना आसान नहीं माना जा रहा है.


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