Iraqi Terror Leader: अमेरिकी रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम ने 23 अप्रैल को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अल-सराजी की सही लोकेशन या पहचान बताने वाले को मोटा इनाम दिया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारी देने वाले व्यक्ति को दूसरी जगह बसाने (relocation) की सुविधा भी दी जाएगी. इसके लिए सिग्नल ऐप या टॉर (Tor) टिपलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
ईरान से है सीधा कनेक्शन
इंटरनेशनल पॉलिसी ऑर्गेनाइजेशन ‘काउंटर एक्सट्रीमिस्म प्रोजेक्ट’ (CEP) की रिपोर्ट के अनुसार, KSS एक इराकी मिलिशिया है जिसे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का पूरा सपोर्ट मिलता है. यह संगठन सीरिया और इराक दोनों देशों में सक्रिय रहा है. 2014 में जब ISIS का प्रभाव बढ़ा था, तब इस संगठन ने अपनी ताकत बढ़ाई और अब यह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) के हिस्से के रूप में काम करता है.
आतंकी संगठन घोषित होने के बाद बढ़ी सख्ती
अमेरिका ने नवंबर 2023 में अल-सराजी और KSS को ग्लोबल आतंकी (SDGT) घोषित किया था. इसके बाद सितंबर 2025 में विदेश विभाग ने इसे विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) का दर्जा दे दिया. इस दर्जे के बाद अमेरिका को इस ग्रुप के खिलाफ कड़े कानूनी और वित्तीय कदम उठाने की ताकत मिल गई है, जिसमें लीडरशिप पर बड़ा इनाम रखना भी शामिल है.
खाड़ी देशों पर हमले का खतरा
वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के एनालिसिस के अनुसार, इराक के ये ग्रुप अब कुवैत जैसे खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहे हैं. इसके लिए वे ‘सराया औलिया अल-दम’ नाम के ब्रांड का इस्तेमाल करते हैं. रिपोर्ट बताती है कि ये ग्रुप 100 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज वाली सटीक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं.
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पुराने एक्शन को दोहराने की तैयारी
वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के एनालिसिस के मुताबिक, अमेरिका को 2024 की शुरुआत वाला फॉर्मूला फिर अपनाना चाहिए. उस वक्त अमेरिका ने बगदाद में एयर स्ट्राइक करके अबू ताकवा अल-सईदी और अबू बक्र अल-सईदी जैसे बड़े नेताओं को खत्म किया था. रिपोर्ट कहती है कि बड़े लीडर्स को निशाना बनाने से ही इन हमलों के सिलसिले को रोका जा सकता है.
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