अमेरिका के ‘सबसे खतरनाक’ हथियार कौन से? एयर फोर्स जनरल ने गिनाए 3 नाम, बोले- सबसे मुश्किल समय में करेंगे इनका इस्तेमाल

US Air Force Future War Strategy: अमेरिकी वायुसेना के जनरल डेल व्हाइट ने बी-21 रेडर, सेंटिनल आईसीबीएम और एफ-47 लड़ाकू विमान को अमेरिका की भविष्य की सुरक्षा का आधार बताया है. उन्होंने कहा कि किसी बड़े संकट की घड़ी में अमेरिका इन्हीं सैन्य क्षमताओं पर सबसे ज्यादा भरोसा करेगा.

US Air Force Future War Strategy: अमेरिकी वायुसेना ने अपनी भविष्य की सैन्य रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है. यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स (यूएसएएफ) के जनरल डेल व्हाइट ने कहा है कि तीन ऐसे रक्षा कार्यक्रम हैं, जिन पर अमेरिका का भविष्य काफी हद तक निर्भर करता है. ये हैं – बी-21 रेडर स्टेल्थ बॉम्बर, सेंटिनल अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) कार्यक्रम और एफ-47 अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान. उनके मुताबिक  ऐसे हथियार हैं, जिन पर किसी बड़े राष्ट्रीय संकट की स्थिति में अमेरिका भरोसा करेगा.

जनरल व्हाइट ने 8 जून को कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस में रेडर कंबाइंड टेस्ट फोर्स (सीटीएफ) के कर्मियों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारा देश सबसे कठिन और अंधेरे समय में सेंटिनल, बी-21 और एफ-47 की क्षमताओं की ओर देखेगा. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब अमेरिकी वायुसेना ने बी-21 रेडर कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होने की जानकारी दी.

बी-21 रेडर कार्यक्रम में मिला बड़ा मील का पत्थर

वायुसेना के अनुसार हाल ही में एक ऑपरेशनल टेस्ट पायलट ने बी-21 रेडर को एक डेवलपमेंटल टेस्ट पायलट के साथ उड़ाया. अधिकारियों का मानना है कि इससे विमान को जल्द परिचालन सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया तेज होगी. एयर फोर्स का कहना है कि डेवलपमेंट टेस्टिंग और ऑपरेशनल टेस्टिंग को शुरुआती चरण में ही एक साथ जोड़ना ट्रेडिशनल टेस्टिंग मॉडल से अलग कदम है, जिससे समय की बचत होगी और विमान जल्दी सेवा में शामिल हो सकेगा.

जनरल व्हाइट ने कहा, ‘बी-21 कार्यक्रम में ऑपरेशनल और डेवलपमेंटल टेस्टिंग का एकीकरण उस नए कल्चर का उदाहरण है, जिसे हम पूरी वायुसेना में लागू करना चाहते हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह एक अधिक स्मार्ट और तेज सोच है, जो मॉडर्न प्रोडक्शन और टेस्टिंग टेक्निक का उपयोग करती है.’

जनरल व्हाइट ने कहा कि बी-21 कार्यक्रम की प्रगति का सीधा मतलब है कि अमेरिकी सैन्य बलों को जल्द ही और ज्यादा प्रभावी मारक क्षमता उपलब्ध होगी. उन्होंने कहा, ‘रेडर के मामले में इसका अर्थ है कि हम युद्धक्षेत्र में तैनात सैनिकों के हाथों में बेजोड़ घातक क्षमता पहुंचाने के और करीब पहुंच गए हैं.’

अमेरिकी वायुसेना के भविष्य के हथियार.

क्या है बी-21 रेडर?

अमेरिकी रक्षा कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुमन (Northrop Grumman) द्वारा विकसित बी-21 रेडर अमेरिकी वायुसेना का छठी पीढ़ी का स्टेल्थ बॉम्बर है. इसे लंबी दूरी तक पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हमले करने के लिए डिजाइन किया गया है.

यह विमान भविष्य में पुराने बी-1 लांसर और बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स की जगह लेगा. साथ ही यह अमेरिका की परमाणु त्रिस्तरीय रणनीति (न्यूक्लियर ट्रायड) के हवाई हिस्से की मुख्य ताकत बनेगा.

इसमें अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, ओपन-सिस्टम आर्किटेक्चर और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता मौजूद है. अमेरिकी वायुसेना कम से कम 100 बी-21 रेडर खरीदने की योजना पर काम कर रही है. भविष्य में बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस के साथ मिलकर यही विमान अमेरिकी बॉम्बर बेड़े की रीढ़ बनेंगे.

दूसरे बी-21 विमान के आने से बढ़ी परीक्षण की रफ्तार

अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक पिछले साल गर्मियों में एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर दूसरे बी-21 विमान के पहुंचने के बाद परीक्षण कार्यक्रम ने नई गति पकड़ी. अब केवल उड़ान प्रदर्शन की जांच तक सीमित रहने के बजाय टीम मिशन सिस्टम और हथियार एकीकरण परीक्षणों पर भी काम कर रही है.

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सेंटिनल: 50 साल पुराने मिसाइल सिस्टम का उत्तराधिकारी

जनरल व्हाइट ने सेंटिनल कार्यक्रम को भी अमेरिका के भविष्य के लिए बेहद अहम बताया. यह अमेरिकी वायुसेना की नई पीढ़ी की आईसीबीएम प्रणाली है, जो पिछले पांच दशकों से सेवा में मौजूद मिनटमैन-3 मिसाइलों की जगह लेगी.

इस कार्यक्रम में नई मिसाइलों के अलावा कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण भी शामिल है. साथ ही अमेरिका के पांच राज्यों में मौजूद बुनियादी ढांचे को भी अपग्रेड किया जा रहा है.

वायुसेना का लक्ष्य है कि सेंटिनल प्रणाली 2075 तक प्रभावी रूप से सेवा देती रहे. यह अमेरिका की परमाणु त्रिस्तरीय रणनीति के भूमि आधारित हिस्से की मुख्य ताकत बनेगी.

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एफ-47: एफ-22 रैप्टर का उत्तराधिकारी

जनरल व्हाइट ने एफ-47 लड़ाकू विमान को भी भविष्य का निर्णायक हथियार बताया. यह विमान नेक्स्ट जनरेशन एयर डॉमिनेंस (एनजीएडी) कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है. इसे अमेरिकी कंपनी बोइंग तैयार कर रही है.

एफ-47 का उद्देश्य एफ-22 रैप्टर की जगह लेना है. यह भविष्य में सहयोगी कॉम्बैट ड्रोन यानी कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) के साथ मिलकर अत्यधिक चुनौतीपूर्ण युद्धक्षेत्रों में काम करेगा. वायुसेना के अनुसार इसकी लड़ाकू क्षमता 1,000 नॉटिकल मील से अधिक होगी, यह मैक-2 से ज्यादा गति हासिल कर सकेगा और इसमें उन्नत स्टेल्थ तकनीक भी होगी.

अमेरिका 185 से अधिक एफ-47 विमानों की खरीद की योजना बना रहा है ताकि उभरते खतरों के बीच अपनी हवाई श्रेष्ठता बनाए रखी जा सके.

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