81 साल के नेता ने लगातार 5वीं बार जीता राष्ट्रपति चुनाव, 72% वोट मिले, विरोधी के घर घुसी सेना, जान बचाकर भागे

युगांडा के राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर योवेरी मुसेवेनी जीते हैं. उन्होंने विपक्षी नेता बॉबी वाइन को बड़े मार्जिन से हराया. यह उनकी लगातार 5वीं जीत है. मुसेवेनी की जीत के बाद विपक्षी नेता बोबी वाइन जान बचाकर भागे, क्योंकि उनके घर सेना का छापा पड़ा.

युगांडा के चुनावों में सीनियर नेता योवेरी मुसेवेनी एक बार फिर चुनाव जीत गए हैं. युगांडा के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें 72% वोट मिले. जबकि उनके मुख्य विरोधी, पॉप सिंगर से नेता बने बोबी वाइन ने 24% वोट हासिल किए. कंपाला में चुनाव आयोग ने शनिवार को यह घोषणा की. 81 वर्षीय मुसेवेनी की यह लगातार पांचवीं जीत है. हालांकि, उनके चुनाव पर हिंसा और चुनावी धांधली के आरोप भी लग रहे हैं. बोबी वाइन ने बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है. इसके साथ ही मुसेवेनी की बढ़ती उम्र भी चिंता का विषय बन रही है कि उनके बाद सत्ता कौन संभालेगा.

मुसेवेनी का लंबा शासन

योवेरी मुसेवेनी 1986 से सत्ता में हैं और उन्होंने विद्रोह के जरिए सरकार बनाई थी. बाद में उन्होंने संविधान में दो बार संशोधन कर आयु सीमा और कार्यकाल सीमा हटा दी. इससे सत्ता पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई. उन्होंने 2021 में बोबी वाइन को 58% वोटों से हराया था. अमेरिका ने उस चुनाव को न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष बताया था. इस बार के चुनाव अभियान के दौरान भी बोबी वाइन की रैलियों को बार-बार सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और गोलियों से तितर-बितर किया. इसमें कम से कम एक आदमी की मौत हुई और वाइन के सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किया गया.

बोबी वाइन को घर से भागना पड़ा

बोबी वाइन का असली नाम रॉबर्ट क्यागुलान्यी है. उन्होंने कहा कि वह अपने घर पर हुए सैन्य छापे से बचकर निकले हैं और फिलहाल छिपे हुए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा कि पिछली रात हमारे घर के लिए बहुत मुश्किल थी. सेना और पुलिस ने छापा मारा, बिजली काट दी और हमारे कुछ सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य अभी भी घर में नजरबंद हैं. हालांकि इस बारे में और भी जानकारी सामने नहीं आई है. 

पश्चिमी देशों का समर्थन

मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चिंताओं के बावजूद, मुसेवेनी को पश्चिमी देशों से समर्थन मिलता रहा है. खासकर सोमालिया जैसे क्षेत्रीय संघर्षों में सैनिक भेजने और लाखों शरणार्थियों को शरण देने के कारण. कई युगांडाई नागरिक उन्हें देश में स्थिरता बनाए रखने का क्रेडिट देते हैं. वे मानते हैं कि मुसेवेनी ने अब तक के वादे को निभाया है. इस बार भी उन्होंने उसी के साथ चुनाव लड़ा. 

मुसेवेनी के बाद कौन होगा नेता?

मुसेवेनी के बाद कौन? यानी उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी बहस चल रही है. माना जाता है कि वह अपने बेटे और सेना प्रमुख मुहूजी काइनरुगाबा को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं. हालांकि, वह इससे इनकार करते हैं. स्काई न्यूज को दिए एक हालिया इंटरव्यू में सत्ता छोड़ने की मांगों को खारिज करते हुए मुसेवेनी ने कहा था कि वह अभी उपलब्ध हैं. मरे नहीं हैं, न ही मानसिक रूप से कमजोर हुए हैं और अभी भी उनके पास अनुभव और ज्ञान है. उन्होंने कहा कि अगर आप सच में अपने देश को लेकर गंभीर हैं, तो उनका लाभ क्यों नहीं उठाना चाहेगा?

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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