Trump Iran War: मंगलवार (31 मार्च) को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के इस्फहान शहर पर भीषण एयरस्ट्राइक की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के एक बड़े गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धमाकों का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें आग की लपटें और धुएं का गुबार साफ दिख रहा है. हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई की अभी पुष्टि नहीं हुई है. इस्फहान में ईरान का न्यूक्लियर केंद्र और बदर सैन्य एयरबेस भी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
अंडरग्राउंड ठिकानों में छिपाया गया 540 किलो यूरेनियम
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपना लगभग 540 किलो ‘हाइली एनरिच्ड यूरेनियम’ इस्फहान की जमीन के नीचे बने सुरक्षित ठिकानों में शिफ्ट कर दिया है. धमाके इतने जोरदार थे कि पूरे शहर में झटके महसूस किए गए. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो उसके एनर्जी और न्यूक्लियर ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा. हमले का वीडियो नीचे देख सकते हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया में हाहाकार
पिछले चार हफ्तों से चल रही इस जंग की वजह से समुद्र का सबसे जरूरी रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग बंद है. इससे दुनिया भर में तेल, खाद और हीलियम जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई रुक गई है. कुवैत के तेल टैंकर ‘अल-साल्मी’ पर भी हमला हुआ है, जिससे समुद्र में तेल फैलने की आशंका है. सऊदी अरब, कुवैत और यूएई ने भी कई ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है.
क्या ट्रंप जंग रोकने की तैयारी में हैं?
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अपने करीबियों से कह रहे हैं कि वे इस सैन्य अभियान को खत्म करना चाहते हैं. ट्रंप का मानना है कि इस रास्ते को जबरदस्ती खुलवाने में बहुत वक्त लगेगा, जबकि वे इस जंग को 4 से 6 हफ्ते में ही समेटना चाहते थे. अब अमेरिका का प्लान ईरान की नौसेना और मिसाइल ताकत को कमजोर करके कूटनीति (डिप्लोमेसी) के जरिए रास्ता खुलवाने का है.
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इजरायल और पड़ोसियों पर भी मंडराया संकट
इस युद्ध की आंच अब दूसरे देशों तक पहुंच गई है. यमन के हूती विद्रोहियों और लेबनान के हिजबुल्ला ने भी इजरायल पर हमले शुरू कर दिए हैं. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो (NATO) ने बीच रास्ते में ही मार गिराया. 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग ने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है और ग्लोबल इकोनॉमी को भारी नुकसान पहुंचाया है.
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