Trump Iran Ultimatum: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को आखिरी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर तय समय के भीतर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का रास्ता नहीं खोला गया, तो अगले 48 घंटों में ईरान पर भीषण हमले किए जाएंगे. ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने ईरान को समझौता करने या रास्ता खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था, जिसकी समयसीमा अब खत्म होने वाली है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया था. इस मिशन का मुख्य मकसद ईरान की मिसाइल ताकत को खत्म करना, उसकी नौसेना को पंगु बनाना और न्यूक्लियर हथियार बनाने के रास्ते को रोकना था.
हालांकि, युद्ध के पांचवें हफ्ते में ट्रंप के बयानों में काफी बदलाव देखा गया है. कभी वे कहते हैं कि यह लड़ाई तेल के लिए नहीं है, तो कभी वे ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा कर मुनाफा कमाने की बात करते हैं. ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिका ईरान के बिजली घरों, तेल के कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर सकता है.
ईरान की जवाबी चेतावनी
ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा है कि अगर ट्रंप सेना भेजते हैं, तो उन्हें वापस बुलाने का फैसला उनके हाथ में नहीं होगा क्योंकि ‘नरक से कोई वापस नहीं आता’. वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि अगर अमेरिका एक हमला करेगा, तो उसे कई जवाबी हमले झेलने होंगे. इस बीच, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है. ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि वे इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, ताकि युद्ध का कोई स्थायी समाधान निकल सके.
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पाकिस्तान और चीन का बातचीत पर जोर
‘डॉन’ अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और चीन लगातार ईरान पर बातचीत के लिए दबाव बना रहे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने उन खबरों को गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि शांति वार्ता रुक गई है. ‘पीटीआई’ (पाकिस्तान न्यूज एजेंसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है.
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में 3,500 से अधिक सैनिक तैनात कर दिए हैं, जिनमें ‘यूएसएस त्रिपोली’ पर मौजूद मरीन भी शामिल हैं. अमेरिका अब खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने पर विचार कर रहा है.
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