ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, विरोध करने वाले यूरोपीय देशों को टैक्स की वॉर्निंग

ग्रीनलैंड को खरीदने के बारे में डोनाल्ड ट्रंप के बयान से काफी विवाद खड़ा हो गया है. हजारों लोग सड़कों पर उतरकर 'Greenland for Greenlanders' के नारे लगा रहे हैं. ट्रंप ने विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाने की धमकी दी है. उधर 85% ग्रीनलैंडर्स अमेरिका के साथ जाने के खिलाफ हैं. जानिए आखिर ट्रंप क्यों चाहते हैं यह आइलैंड.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर कब्जा करने वाले बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा खड़ा कर दिया है. इस फैसले के खिलाफ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. राजधानी नूक से लेकर कोपेनहेगन तक, हर जगह लोग रेड-एंड-वाइट झंडे लहराते हुए ट्रंप के ‘हड़प नीति’ का विरोध कर रहे हैं.

प्यार से नहीं तो जबरदस्ती लेंगे ग्रीनलैंड- ट्रंप

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि वह ग्रीनलैंड को ‘सीधे तरीके’ (खरीदकर) या फिर ‘कठिन तरीके’ (मिलिट्री प्रेशर) से लेकर रहेंगे. ट्रंप को लगता है कि नॉर्थ अमेरिका और आर्कटिक के बीच होने की वजह से यह आइलैंड समुद्री रास्तों और मिसाइल खतरों पर नजर रखने के लिए बेस्ट लोकेशन है. साथ ही, यहाँ मौजूद बेशुमार नेचुरल रिसोर्सेज पर भी उनकी नजर है.

ट्रंप ने यूरोप को दिया टैरिफ की धमकी

ट्रंप सिर्फ बयानबाजी तक ही नहीं रुके; उन्होंने उन यूरोपीय देशों को भी निशाना बनाया जो डेनमार्क का समर्थन कर रहे हैं. अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर उन्होंने ऐलान किया कि अगर ग्रीनलैंड की डील फाइनल नहीं हुई, तो 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी और यूके जैसे देशों पर 10% का टैरिफ (टैक्स) लगेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 1 जून तक डील नहीं हुई, तो इस टैक्स को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा. ट्रंप का कहना है कि ये देश उनके साथ एक खतरनाक गेम खेल रहे हैं.

ग्रीनलैंड के 85% लोग अमेरिका के खिलाफ

प्रदर्शन के दौरान ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन खुद जनता के बीच पहुंचे. लोगों के हाथों में ‘Hands off Greenland’ और ‘Greenland for Greenlanders’ जैसे स्लोगन वाली पटरी थीं. ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, करीब 85% जनता अमेरिका में शामिल होने के सख्त खिलाफ है. ग्रीनलैंड की नेता कैमिला सीजिंग का कहना है कि वे डेनमार्क के साथ खुश हैं और उन्हें अपनी मर्जी से जीने का पूरा हक है. उनके मुताबिक, ग्रीनलैंड कोई सामान नहीं है जिसे बाजार में बेचा जा सके.

डेनमार्क के सपोर्ट में उतरा यूरोप

इस विवाद में अब यूरोप के बड़े देश भी कूद पड़े हैं. फ्रांस, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देशों ने डेनमार्क को सपोर्ट करते हुए अपनी छोटी सैन्य टुकड़ियां ग्रीनलैंड भेजी हैं, जिसे वे ‘सर्च मिशन’ बता रहे हैं. वहीं, अमेरिका के अंदर भी ट्रंप का विरोध शुरू हो गया है.

अमेरिकी कांग्रेस का एक डेलिगेशन, जिसमें डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस कून्स भी शामिल हैं, उन्होंने ट्रंप की भाषा को ‘गलत’ बताया है. हालांकि, यूएन में अमेरिकी एंबेसडर माइक वाल्ट्ज का तर्क है कि डेनमार्क के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अकेले ग्रीनलैंड को संभाल सके, इसलिए अमेरिका का वहां होना सबके हित में है.

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Published by: Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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