रूस से तेल खरीदने की मिली छूट: ट्रंप सरकार के फैसले पर भड़के अमेरिकी सांसद, कहा- यह शर्मनाक यू-टर्न

Russian Oil Waiver: रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट के बीच ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों से राहत देने का बड़ा फैसला लिया है. इस कदम से भारत समेत कई देशों को राहत मिलेगी, लेकिन अमेरिका में ही इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है. विपक्षी सांसदों ने इसे सरकारी नीति का बड़ा यू-टर्न बताया है.

Russian Oil Waiver: अमेरिका में जो बाइडन की पार्टी (डेमोक्रेट्स) ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार के एक ताजा फैसले पर जमकर हमला बोला है. दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने की पाबंदी में एक बार फिर छूट दे दी है. सीनेट के बड़े नेताओं ने इसे सरकार का ‘180 डिग्री यू-टर्न’ और ‘शर्मनाक’ कदम बताया है. डेमोक्रेट्स का कहना है कि एक तरफ रूस यूक्रेन पर बड़े हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका उसे आर्थिक फायदा पहुंचा रहा है.

क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?

डेमोक्रेटिक नेता जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने एक साझा बयान जारी कर ‘रूस जनरल लाइसेंस 134’ को फिर से लागू करने की निंदा की है. यह लाइसेंस उन कंपनियों को सजा से बचाता है जो रूसी तेल खरीद रही हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अभी बुधवार (15 अप्रैल) को ही व्हाइट हाउस में कहा था कि सरकार रूस और ईरान के तेल पर पाबंदी में अब और ढील नहीं देगी. लेकिन केवल दो दिन बाद ही सरकार ने अपना फैसला बदल लिया.

यूक्रेन पर हमले के बीच मिली राहत

सीनेटरों ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन पर इस साल का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई. उन्होंने सवाल उठाया कि जब रूस निर्दोष लोगों को मार रहा है, तब उसे तेल बेचकर पैसा कमाने की छूट देना दुनिया को क्या मैसेज देता है? सांसदों ने आरोप लगाया कि पुतिन को सख्त मैसेज देने के बजाय सरकार उन्हें फायदा पहुंचा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूस पर दबाव नहीं बढ़ाया गया, तो यूक्रेन युद्ध और लंबा खिंचेगा और मासूमों की जान जाती रहेगी.

नई डेडलाइन और भारत पर असर

ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ऑफिशियल डॉक्यूमेंट के मुताबिक, अब 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हुए रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को 16 मई तक खरीदने की मंजूरी दे दी गई है. यह 30 दिनों का नया वेवर है, क्योंकि पिछला वेवर 11 अप्रैल को खत्म हो गया था. इस फैसले का फायदा भारत समेत उन तमाम देशों को मिलेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं. सरकार का तर्क है कि मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए यह कदम उठाया गया है.

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रूस को ईरान के साथ चल रहे तनाव का आर्थिक फायदा मिला

रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस को ईरान के साथ चल रहे तनाव का आर्थिक फायदा मिला है. मार्च के महीने में रूसी तेल से होने वाली कमाई काफी बढ़ गई थी. ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने यह भी बताया कि 20 मार्च को दिए गए पिछले वेवर की वजह से करीब 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल ग्लोबल मार्केट में पहुंच सका, जिससे कीमतों को काबू करने में मदद मिली. हालांकि, विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की है कि वे पुतिन पर और कड़े प्रतिबंध लगाएं ताकि युद्ध को रोका जा सके.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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