SC/ST एक्ट जैसा कानून दुनिया के 7 देशों में कैसे काम करता है? जानिए आदिवासी और अल्पसंख्यक अधिकारों की कानूनी सुरक्षा

भारत का SC/ST Prevention of Atrocities Act, 1989 अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अत्याचार रोकने, विशेष अदालतों और पीड़ितों के राहत-पुनर्वास की व्यवस्था करता है. लेकिन अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अन्य देशों में ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा कैसे होती है?

भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ होने वाले विशिष्ट अत्याचारों से निपटने के लिए Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 लागू है.

यह सामान्य anti-discrimination कानून से अलग है. इसका उद्देश्य केवल भेदभाव को रोकना नहीं, बल्कि SC/ST समुदायों के खिलाफ कानून में परिभाषित कई विशिष्ट कृत्यों को अपराध बनाना, उनके लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था करना और पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास देना है. कानून 11 सितंबर 1989 को पारित हुआ और 30 जनवरी 1990 से लागू हुआ.

इस कानून की जरूरत के पीछे संसद के Statement of Objects and Reasons में सामाजिक और आर्थिक वंचना, नागरिक अधिकारों से वंचित किए जाने, अपमान, हिंसा, भूमि और श्रम से जुड़े विवाद तथा अस्पृश्यता जैसी ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख किया गया था.

लेकिन क्या दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसा कोई कानून है?

जवाब है—हां, लेकिन बिल्कुल उसी रूप में नहीं.

कई देशों ने अपने इतिहास, उपनिवेशवाद, नस्लीय भेदभाव, दासता, Indigenous dispossession या जातीय संघर्ष के अनुभवों के आधार पर अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं बनाई हैं.

आइए 10 देशों को समझते हैं.

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1. अमेरिका: Civil Rights Act, 1964

अमेरिका में नस्ली भेदभाव के खिलाफ आधुनिक कानूनी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव Civil Rights Act, 1964 था.

यह कानून उस दौर में आया जब अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ नस्ली segregation और भेदभाव के विरुद्ध नागरिक अधिकार आंदोलन चल रहा था.

कानून के Title II ने सार्वजनिक सुविधाओं में race, color, religion और national origin के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित किया. संघीय कानून में कई अन्य प्रावधानों के जरिए रोजगार और संघीय वित्तपोषित कार्यक्रमों में भेदभाव पर भी रोक लगाई गई.

इसका महत्व क्या है?

अमेरिकी मॉडल मुख्यतः समान नागरिक अधिकार और anti-discrimination पर आधारित है. यह भारत के SC/ST Act की तरह केवल किसी एक संवैधानिक रूप से सूचीबद्ध समुदाय के खिलाफ 'atrocities' की एक अलग अपराध-सूची नहीं बनाता.

अर्थात दोनों कानूनों का लक्ष्य भेदभाव और ऐतिहासिक असमानता से निपटना है, लेकिन कानूनी ढांचा अलग है.

AI जेनेरेटेड.

2. कनाडा: Indigenous Rights और UN Declaration Act

कनाडा का इतिहास Indigenous First Nations, Inuit और Métis समुदायों के साथ औपनिवेशिक नीतियों और भूमि से जुड़े संघर्षों से जुड़ा है.

यहां Indian Act लंबे समय से First Nations से संबंधित एक प्रमुख संघीय कानून रहा है. इसमें band governance, reserve lands और registration जैसे विषय शामिल हैं. वर्तमान कानून 1985 के Revised Statutes में मौजूद है और समय-समय पर संशोधित हुआ है.

लेकिन कनाडा की आधुनिक व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण कदम United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples Act, 2021 है.

इस कानून का उद्देश्य UN Declaration on the Rights of Indigenous Peoples को कनाडाई कानून में लागू करने का ढांचा तैयार करना है। संघीय सरकार को Indigenous peoples के साथ consultation और cooperation के जरिए कानूनों को Declaration के अनुरूप बनाने की दिशा में काम करना है.

खास बात

कनाडा में Indigenous rights का सवाल केवल discrimination तक सीमित नहीं है. इसमें self-determination, land, culture, governance और reconciliation भी शामिल हैं.

3. ऑस्ट्रेलिया: Racial Discrimination Act और Native Title Act

ऑस्ट्रेलिया में Aboriginal और Torres Strait Islander peoples के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा कई कानूनों के जरिए होती है.

Racial Discrimination Act, 1975 ने race, colour, descent और national or ethnic origin के आधार पर भेदभाव को गैरकानूनी बनाया. कानून में equality before law और public facilities सहित कई क्षेत्रों में सुरक्षा दी गई है.

इसके बाद Native Title Act, 1993 एक महत्वपूर्ण मोड़ था.

इस कानून का उद्देश्य Aboriginal और Torres Strait Islander peoples के native title को पहचानना और संरक्षित करना था. कानून में native-title claims तय करने, प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए प्रक्रियाएं और कुछ परिस्थितियों में compensation जैसी व्यवस्थाएं हैं.

ऐतिहासिक संदर्भ

Native Title Act उस कानूनी बदलाव की पृष्ठभूमि में आया जिसमें ऑस्ट्रेलियाई High Court ने Mabo मामले में terra nullius की पुरानी कानूनी अवधारणा को खारिज करते हुए Indigenous peoples के traditional land rights को मान्यता दी.

इसलिए ऑस्ट्रेलियाई मॉडल में भेदभाव-विरोध + भूमि अधिकार दोनों महत्वपूर्ण हैं.

4. दक्षिण अफ्रीका: Apartheid के बाद Equality Law

दक्षिण अफ्रीका का अनुभव दुनिया में नस्ली भेदभाव के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उदाहरणों में गिना जाता है.

Apartheid व्यवस्था के बाद 1996 के संविधान ने equality और non-discrimination को केंद्रीय संवैधानिक मूल्य बनाया.

इसी संवैधानिक ढांचे के तहत Promotion of Equality and Prevention of Unfair Discrimination Act, 2000 (PEPUDA) बनाया गया.

इसका उद्देश्य equality को बढ़ावा देना और unfair discrimination को रोकना है. कानून संविधान के section 9 से जुड़ा है और race सहित विभिन्न आधारों पर unfair discrimination के खिलाफ व्यवस्था देता है.

इसके अतिरिक्त Prevention and Combating of Hate Crimes and Hate Speech Act, 2023 ने hate crimes और hate speech के लिए अलग कानूनी ढांचा बनाया. इसे मई 2024 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली.

भारत से समानता

यहां भारत के SC/ST Act से एक दिलचस्प तुलना सामने आती है—दक्षिण अफ्रीका में भी ऐतिहासिक असमानता को देखते हुए केवल सभी बराबर हैं कहना पर्याप्त नहीं माना गया; कानून ने discrimination की रोकथाम के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था बनाई.

5. ब्राजील: Racial Equality Statute, 2010

ब्राजील में नस्ली असमानता और खासकर Afro-Brazilian population से जुड़े ऐतिहासिक प्रश्नों के संदर्भ में Statute of Racial Equality महत्वपूर्ण है.

Law No. 12.288, 2010 ने Racial Equality Statute स्थापित किया.

इसका उद्देश्य Black population के लिए equal opportunities सुनिश्चित करना, ethnic rights की रक्षा करना और racial discrimination तथा ethnic intolerance का मुकाबला करना है.

क्या प्रावधान हैं?

कानून racial discrimination को race, colour, descent या national/ethnic origin पर आधारित ऐसे distinction, exclusion, restriction या preference के रूप में देखता है जो समान मानवाधिकारों और fundamental freedoms के प्रयोग को प्रभावित करे.

ब्राजील का मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल criminal punishment नहीं, बल्कि equal opportunity और public policy का भी बड़ा हिस्सा है.

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6. मेक्सिको: Indigenous autonomy और anti-discrimination

मेक्सिको की व्यवस्था में Indigenous peoples के अधिकारों को संविधान के Article 2 में विशेष महत्व दिया गया है.

मेक्सिको स्वयं को pluricultural nation के रूप में मान्यता देता है और Indigenous peoples को self-determination और autonomy से जुड़े अधिकार देता है.

इनमें अपनी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को व्यवस्थित करने, अपनी भाषाओं और संस्कृति को संरक्षित करने तथा कुछ मामलों में अपने customary systems के अनुसार आंतरिक विवादों के समाधान जैसे अधिकार शामिल हैं.

इसके अलावा Federal Law to Prevent and Eliminate Discrimination 2003 में लागू हुई। इसका वर्तमान पाठ नवंबर 2025 तक संशोधित है.

नया बदलाव

2024 के संवैधानिक सुधारों ने Indigenous और Afro-Mexican peoples की सार्वजनिक-कानूनी पहचान तथा उनके अधिकारों को और मजबूत किया. इसमें consultation, cultural identity, languages, traditional knowledge और self-determination से जुड़े पहलू शामिल हैं.

7. न्यूजीलैंड: Human Rights Act और Māori अधिकार

न्यूजीलैंड में Māori Indigenous population के अधिकारों का प्रश्न देश के संवैधानिक और ऐतिहासिक ढांचे से जुड़ा है.

Human Rights Act, 1993 में race, colour और ethnic or national origins को prohibited grounds of discrimination में शामिल किया गया है.

लेकिन Māori अधिकारों की चर्चा केवल anti-discrimination law तक सीमित नहीं है. इसका ऐतिहासिक आधार Treaty of Waitangi, 1840 से जुड़ा है, जिसने ब्रिटिश Crown और Māori chiefs के बीच संबंधों का आधार बनाया.

खास बात

इसलिए न्यूजीलैंड का मॉडल दो स्तरों पर समझा जा सकता है:

सामान्य anti-discrimination protection + Māori-specific treaty-based rights.

यही उसे भारत के मॉडल से अलग बनाता है.

तो क्या इन देशों में भारत जैसा SC/ST Act है?

ठीक उसी रूप में नहीं.

यही इस तुलना की सबसे महत्वपूर्ण बात है.

भारत का SC/ST Prevention of Atrocities Act, 1989 विशेष रूप से SC/ST सदस्यों के खिलाफ कानून में निर्धारित अत्याचारों को संबोधित करता है. इसमें Special Courts, Exclusive Special Courts, Special Public Prosecutors, victim and witness rights, preventive action और relief-rehabilitation जैसी विशेष व्यवस्थाएं हैं.

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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