Sao Jorge Island Volcano: रिसर्च के मुताबिक, उस वक्त जमीन से करीब 26 किलोमीटर नीचे मैग्मा (पिघला हुआ लावा) बहुत तेजी से ऊपर की तरफ आ रहा था. यह मैग्मा बढ़ते-बढ़ते जमीन की सतह से सिर्फ 1.6 किलोमीटर नीचे तक पहुंच गया था.
32 हजार स्विमिंग पूल जितना था लावा
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह एक ‘फेल्ड इरप्शन’ था, यानी ज्वालामुखी फटने ही वाला था पर रुक गया. इसमें इतना ज्यादा मैग्मा था कि उससे ओलंपिक साइज के 32,000 स्विमिंग पूल भरे जा सकते थे. स्टडी के लीड ऑथर डॉ. स्टीफन हिक्स ने बताया कि मैग्मा धरती की परतों के बीच बहुत शांति से ऊपर चढ़ा, जिसे पकड़ पाना बहुत मुश्किल था.
पिको डो कारवाओ फॉल्ट ने ऐसे बचाई जान
जांच में पता चला कि मैग्मा ‘पिको डो कारवाओ फॉल्ट जोन’ नाम की जगह से गुजर रहा था. यह आइलैंड का सबसे बड़ा फॉल्ट सिस्टम (जमीन की दरार) है. वैज्ञानिकों ने पाया कि यह दरार दो तरह से काम करती है. एक तरफ तो इसने मैग्मा को ऊपर आने का रास्ता दिया, लेकिन दूसरी तरफ इसी दरार ने गैसों और तरल पदार्थों को किनारे से बाहर निकलने का मौका भी दे दिया. इससे अंदर का प्रेशर कम हो गया और मैग्मा सतह फाड़कर बाहर नहीं आ पाया.
हाई-टेक मशीनों से खुली पूरी सच्चाई
इस पूरी घटना को समझने के लिए रिसर्चर्स ने जमीन और समंदर की गहराई में लगे सीस्मोमीटर, सैटेलाइट डेटा और जीपीएस का इस्तेमाल किया. सैटेलाइट रडार इमेजिंग की मदद से वैज्ञानिक जमीन के नीचे की हलचल को एकदम सटीक तरीके से देख पाए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्टडी से भविष्य में ज्वालामुखी फटने की भविष्यवाणी करना आसान हो जाएगा, जिससे समय रहते लोगों की जान बचाई जा सकेगी.
ये भी पढ़ें: रेगिस्तान में मिला 500 साल पुराना खजाना: दफन पुर्तगाली जहाज से निकले सोने के सिक्के और हाथी दांत
