Pakistan Comment on India: भारत के कई अंदरूनी मसलों पर पाकिस्तान ने भड़काऊ टिप्पणी की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने अपने वीकली प्रेस ब्रीफिंग में ये बातें कीं. उन्होंने भारत की यूनिवर्सिटी में हुए कार्यक्रम और बीजेपी नेताओं के बयान पर आपत्ति जताई है. इसके साथ ही अंद्राबी ने कश्मीर और कश्मीर में उर्दू भाषा पर भी कमेंट किया है. इस प्रेस ब्रीफिंग के बहाने पाकिस्तान ने आरएसएस, बीजेपी पर हमला बोलते हुए भारत को नसीहत दी है.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 पूरे होने पर शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम हो रहे हैं. इसी के तहत जामिया मिलिया इस्लामिया के FET ऑडिटोरियम में भी मगंलवार 28 अप्रैल को युवा कुंभ कार्यक्रम होना था. इसे लेकर भारत के कुछ छात्र संगठनों ने विरोध किया. अब इस मामले पर पाकिस्तान भी कूद पड़ा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को इस्लामाबाद में प्रेस ब्रीफिंग की.
अंद्राबी ने कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए इसके बारे में पता चला, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कट्टर हिंदू विचारधारा अब शैक्षणिक संस्थानों तक भी पहुंच रही है. अंद्राबी के मुताबिक, जामिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की अपनी एक सुदृढ़ परंपरा और पहचान रही है, इसलिए वहां ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं. उन्होंने यह भी जोर दिया कि शिक्षा संस्थानों का इस्तेमाल किसी तरह के प्रचार या नफरत फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए.
अंद्राबी बोले- मुस्लिम समुदाय की पहचान खतरे में
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जामिया भारतीय अल्पसंख्यकों का एक प्रमुख संस्थान रहा है, जिसका इतिहास काफी समृद्ध और गौरवशाली रहा है. ताहिर अंद्राबी ने जामिया में आरएसएस से जुड़े ऐसे किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा की. उन्होंने आगे कहा कि भारत में मुस्लिम समुदाय की भाषा और पहचान की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगे आना चाहिए और इस मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए. उनके मुताबिक, जामिया मिलिया में आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन शिक्षा के हिंदूकरण की दिशा में एक कदम है और इसे भारतीय अल्पसंख्यक संस्थानों पर दबाव या हस्तक्षेप के रूप में देखा जाना चाहिए.
नेता के मुस्लिमों पर बयान हेट स्पीच: अंद्राबी
पाकिस्तान के प्रवक्ता ने भारतीय नेता के एक कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. एक पाकिस्तानी पत्रकार के हवाले से दावा किया गया कि एक राजनेता ने मुस्लिमों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी (मुस्लिम जिहाद करते हैं और सूअरों की तरह बच्चे पदा करते हैं) की है. इस पर ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल बेहद अनुचित और निंदनीय है. इस तरह के बयान पहले भी कुछ भारतीय नेताओं विशेषकर बीजेपी और हिंदुत्व से जुड़े लोगों द्वारा आते रहे हैं, ऐसे बयान उनके व्यक्तिगत विचारों को दर्शाते हैं.
उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से हेट स्पीच बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसका संज्ञान लेना चाहिए. अंद्राबी ने कहा कि भारत को अपने अंतराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए भारतीय अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिमों के खिलाफ दिए जा रहे बयानों पर रोक लगानी चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.
अंद्राबी का आरोप- बदला जा रहा कश्मीर का इतिहास
एक पत्रकार ने प्रश्न पूछा कि कश्मीर में बाहरी हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है और वहां के स्थानीय मुस्लिमों की पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. कश्मीर का इतिहास बदला जा रहा है, पाठ्यपुस्तकों में कश्मीर से जुड़ी सामग्री को हटाया या बदला जा रहा है. ईरान युद्ध की वजह से लोगों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है. हम इसके बारे में दुनिया को कैसे बता सकते हैं कि वहां क्या हो रहा है?
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर ताहिर अंद्राबी ने अपने जवाब में कहा कि भारत सरकार पर जनसांख्यिकीय बदलाव करने के साथ-साथ उर्दू भाषा और मुस्लिम संस्कृति को खत्म करने के प्रयास के आरोप लगते रहे हैं. उनके अनुसार, उर्दू पूरे भारतीय उपमहाद्वीप, खासकर मुस्लिम समुदाय की साझा पहचान का हिस्सा रही है और इस पर किसी भी तरह का दबाव चिंता का विषय है.
उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर में मुस्लिमों की पहचान, भाषा और परंपराओं को निशाना बनाया जाना गलत है और इस पर वैश्विक समुदाय को ध्यान देना चाहिए. ताहिर ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान इस मुद्दे को उठाता रहेगा और दुनिया को भी इस पर चुप नहीं रहना चाहिए. साथ ही, उन्होंने दावा किया कि कश्मीर में भारत की मौजूदगी गैरकानूनी है.
उनके मुताबिक, कश्मीर में भारत की पकड़ तेजी से मजबूत हुई है और वहां की स्थानीय संस्कृति पर बाहरी प्रभाव डालने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने फिर से दोहराया कि जनसांख्यिकीय बदलाव के साथ-साथ उर्दू भाषा और मुस्लिम संस्कृति पर भी असर डाला जा रहा है.
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घर की मुश्किलों को भूलकर भारत को नसीहत
पाकिस्तानी अथॉरिटी द्वारा यह बयान ऐसे समय आ रहे हैं, जब वहां के अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उन पर होने वाले हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे. हिंदू, क्रिश्चियन ग्रुप अपनी धार्मिक पहचान के लिए लड़ रहे हैं. शिया, अहमदिया और बलोच मुस्लिम संगठन भी अपनी आवाज समय-समय पर उठाते रहते हैं. खुद के साथ भेदभाव की आवाज बुलंद करते हुए कई प्रांतों में अलगाववाद की लड़ाई चल रही है. ऐसे हालात में अपने देश पर ध्यान देने की बजाय पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मसलों पर टिप्पणी और नसीहत दे रहा है.
