रूस-यूक्रेन युद्ध के 4 साल: हमलों की तबाही के आंकड़े; लाखों की हुई मौत, इतने बने शरणार्थी

Russia Ukraine War: 24 फरवरी 2026 को रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के चार साल पूरे हो गए. इन चार सालों में हमलों से दोनों पक्षों ने भारी तबाही झेली. लाखों नागरिक मारे गए, शरणार्थी बने और बच्चों का बचपन छिन गया. आंकड़ों में यह तबाही अपकी रूह कंपा देगा.

यूक्रेन पर रूस के हमले को चार साल पूरे हो चुके हैं. 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ यह फुल स्केल युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा युद्ध बन चुका है. इसमें दोनों देशों के हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि हवाई हमलों से दोनों देशों के आम नागरिक भी लगातार प्रभावित हो रहे हैं. कोल्ड वॉर एरा के बाद बनी यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था इस युद्ध की वजह से पूरी तरह बदल गई है. इसकी वजह से ग्लोबल पॉलिटिक्स, इकॉनमी और सिक्योरिटी बुरी तरह प्रभावित हुई है. सैनिक और नागरिक मौतों के अलावा करोड़ों लोग अपना घर छोड़ने के लिए भी  मजबूर हुए हैं, जिसने शरणार्थी संकट तो पैदा नहीं किया, लेकिन दूसरे देशों में मुश्किलें जरूर खड़ी की हैं. 

अमेरिका ने मॉस्को और कीव के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत की कोशिशें की हैं, ताकि युद्ध को रोका जा सके. हालांकि, रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों के भविष्य और युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहने से अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है. मंगलवार को यह युद्ध पांचवें साल में प्रवेश कर गया है और इसके थमने के आसार फिलहाल नजर नहीं आते. आइये चार साल बाद युद्ध की स्थिति को आंकड़ों के जरिए समझते हैं.

कितने सैनिक मारे गए?

दोनों पक्षों के मारे गए, घायल या लापता सैनिकों की अनुमानित अधिकतम 18 लाख है. यह आंकड़ा पिछले महीने जारी सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट में दिया गया है. CSIS के मुताबिक, फरवरी 2022 से दिसंबर 2025 के बीच रूस के करीब 3.25 लाख तक सैनिकों की मौत शामिल है. 

रिपोर्ट के अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी बड़े देश के लिए किसी एक युद्ध में सबसे ज्यादा सैनिक मौतें हैं. रूस ने जनवरी 2023 के बाद से अपने सैन्य नुकसान के आंकड़े जारी नहीं किए हैं. उस समय उसने एक यूक्रेनी हमले में 80 से ज्यादा सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी, जिससे आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई मौतों का आंकड़ा थोड़ा सा 6,000 से ऊपर पहुंचा था.

CSIS का अनुमान है कि यूक्रेन के करीब 1.4 लाख सैनिकों की मौत हुई है. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि युद्ध में 55,000 यूक्रेनी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कई अभी भी लापता हैं. मॉस्को और कीव, दोनों ही सैन्य नुकसान के ताजा आंकड़े नियमित रूप से जारी नहीं करते और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि संभव नहीं है.

आम नागरिकों की मौत 15000 से ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निगरानी मिशन के अनुसार यूक्रेन में आम नागरिकों की मौतों की संख्या 15000 है. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है. इसी अवधि में 40,600 से ज्यादा नागरिक घायल हुए हैं. युद्ध में कम से कम 763 बच्चों की मौत की पुष्टि भी संयुक्त राष्ट्र ने की है. 2025 यूक्रेन में नागरिकों के लिए सबसे घातक साल रहा. इस साल 2,514 नागरिक मारे गए और 12,142 घायल हुए, जो 2024 की तुलना में 31% अधिक है.

19.4% यूक्रेनी जमीन पर रूस का कब्जा

यूक्रेन की वह जमीन, जिस पर इस समय रूस का कब्जा है. यह आंकड़ा युद्ध अध्ययन संस्थान (Institute for the Study of War) के अनुसार है. पिछले एक साल में रूस ने यूक्रेन के सिर्फ 0.79% अतिरिक्त इलाके पर कब्जा किया है. यह दिखाता है कि भारी सैन्य नुकसान के बावजूद रूस को जमीन पर बहुत कम बढ़त मिली है. पूर्ण हमले से पहले रूस यूक्रेन के लगभग 7% हिस्से पर काबिज था, जिसमें क्रीमिया और डोनबास के ही कुछ इलाके शामिल थे. लेकिन अब डोनेट्स्क व लुहान्स्क के कुछ भी रूस के कब्जे में हैं.

59 लाख यूक्रेनी शरणार्थी 

इतने यूक्रेनी नागरिक युद्ध के कारण अपना देश छोड़ चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इनमें से 53 लाख लोग यूरोप में शरण लिए हुए हैं. इसके अलावा, करीब 37 लाख लोग यूक्रेन के भीतर ही अपने घर छोड़कर दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं. युद्ध से पहले यूक्रेन की आबादी 4 करोड़ से ज्यादा थी.

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यूक्रेन की तबाही

इस युद्ध ने यूक्रेन में भारी तबाही मचाई है. यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के कई शहर जैसे बखमुत, टोरेत्स्क और वोवचांस्क लगातार लड़ाई के चलते पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2022 से अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं पर 2,800 से ज्यादा हमलों की पुष्टि की है. वहीं, रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण लाखों लोगों को हीटिंग और बिजली से वंचित रहना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र की माइन एक्शन सर्विस के मुताबिक, यूक्रेन का करीब पांचवां हिस्सा बारूदी सुरंगों या बिना फटे विस्फोटकों से दूषित हो चुका है. वर्ल्ड बैंक ने सोमवार को बताया कि अगले दस वर्षों में यूक्रेन के पुनर्निर्माण पर लगभग 588 अरब डॉलर का खर्च आएगा.

यूक्रेन की अर्थव्यवस्था हुई बर्बाद

इस युद्ध ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है और रूस की अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबाव डाला है. भारी सैन्य खर्च जीडीपी के करीब 9% तक पहुंच गया है. इसके दम पर तेज बढ़त के बाद रूस की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी और पिछले साल सिर्फ 1% की वृद्धि दर्ज की गई. तेल और गैस से होने वाली आय, जो सरकारी बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है, पश्चिमी प्रतिबंधों और यूक्रेनी हमलों के चलते पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई.

यूक्रेन की अर्थव्यवस्था रूस के हमले के बाद पहले साल में लगभग एक-तिहाई सिकुड़ गई थी. कुछ हद तक सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अब सरकार रोजमर्रा के खर्च के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य विदेशी कर्जदाताओं पर निर्भर है.

मित्र देशों ने दी कितनी मदद 

यूक्रेन पश्चिमी देशों से मिलने वाले हथियारों, खुफिया जानकारी और वित्तीय मदद पर काफी हद तक निर्भर है. जर्मनी के कील इंस्टीट्यूट के मुताबिक, यूरोप ने 2022 से अब तक यूक्रेन को 201 अरब यूरो की सहायता दी है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने कुल 115 अरब डॉलर की मदद की है, लेकिन ट्रंप ने हथियार आपूर्ति आंशिक रूप से रोक दी है और यूरोप से ज्यादा जिम्मेदारी उठाने को कह रहे हैं.

वहीं रूस को नॉर्थ कोरिया की मदद मिली है, जिसने हजारों सैनिक रूसी सेना के साथ लड़ने के लिए भेजे हैं और लाखों तोप के गोले मॉस्को को दिए जाने की खबरें हैं. ईरान ने रूस को ड्रोन तकनीक दी है, जबकि चीन उसका अहम आर्थिक साझेदार बन गया है. पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन क्रेमलिन को प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहा है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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