पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा के जनाजे में ‘धुरंधर’ का खौफ, AK-47 की फौज के साथ पहुंचे कई आतंकी

Pulwama Attack Mastermind Hamza Burhan Funeral: पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पीओके में गोली मारकर हत्या कर दी गई. उसके जनाजे में हिजबुल मुजाहिदीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन, अल-बद्र चीफ बख्त जमीन खान और ISI से जुड़े अधिकारी नजर आए, जो भारी सुरक्षा के बीच हथियारों से लैस होकर पहुंचे थे.

Pulwama Attack Mastermind Hamza Burhan Funeral: पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड माना जाने वाला हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में  गुरुवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई. शुक्रवार को इस्लामाबाद में उसके जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसमें कई वांछित आतंकवादी शामिल हुए. आतंकवादियों को पालने वाला पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने एक्सपोज हुआ, जब हमजा बुरहान के जनाजे में हिजबुल मुजाहिद्दीन चीफ सैयद सलाउद्दीन और अल-बद्र सुप्रीमो बख्त जमीन खान और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी नजर आए. लेकिन अब इन आतंकियों के मन में भी खौफ साफ दिख रहा है. 

हमजा बुरहान को भारत ने उसे 2022 में आतंकवादी घोषित कर दिया था, इसके बावजूद वह खुले तौर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहा था. उसे अर्जुमंद गुलजार डार और कोडनेम ‘डॉक्टर’  से भी जाना जाता था. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में इस्लामाबाद में हुए जनाजे के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी. हमजा के जनाजे के दौरान यह अंतिम फोटो बताई जा रही है. देखें-

जनाजे के दौरान खास तौर पर अल-बद्र प्रमुख बख्त जमीन खान की सुरक्षा बेहद कड़ी दिखाई दी. वीडियो में कई हथियारबंद आतंकी AK-47 राइफल और दूसरे आधुनिक हथियारों के साथ सुरक्षा घेरे में नजर आए. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान और POK में हाल के दिनों में आतंकियों की लगातार हो रही रहस्यमयी हत्याओं के कारण सुरक्षा बढ़ाई गई थी. 

उनके मन में भारत के ‘धुरंधरों’ का खौफ बैठ गया है, क्योंकि बीते कुछ महीनों में भारत के कई दुश्मन इसी तरह पाकिस्तान में अलग-अलग जगहों पर मारे गए हैं. हमजा बुरहान की हत्या उन कई आतंकियों और चरमपंथी ऑपरेटिव्स की सूची में शामिल हो गई है, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और पीओके में रहस्यमयी परिस्थितियों में मार दिया गया.

इस जनाजे में शामिल होने के लिए जाते हुए आतंकियों का एक वीडियो सामने आई है. हालांकि, प्रभात खबर इसकी सत्यता को पुष्ट नहीं करता.

भारत का रहने वाला पाकिस्तान कैसे पहुंचा?

पुलवामा के रहने वाले, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर के पिता गुलजार अहमद डार ने बताया कि उनका बेटा बंगलुरु में 2017 में राजीव गांधी विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा था. लेकिन जनवरी 2018 में बिना बताए एमबीबीएस की पढ़ाई करने पाकिस्तान चला गया. पहले सेमेस्टर के बाद वह दिसंबर में कश्मीर आया था, लेकिन फिर जनवरी में वापस पाकिस्तान चला गया. उन्होंने बताया कि जब हमें पता चला कि उसने आतंकी संगठन में शामिल हो गया है, तो हमने उससे नाता तोड़ लिया. 

2019 के पुलवामा अटैक से जुड़ा नाम

हमजा बुरहान पर फरवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप था. इस हमले में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे. वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था. बाद में वह वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान चला गया और अल बद्र आतंकी संगठन में शामिल हो गया.

आतंकी के परिवार पर भी गिरी गाज

भारत के गृह मंत्रालय ने 2022 में हमजा बुरहान को आतंकवादी घोषित किया था. अधिकारियों के अनुसार वह जम्मू-कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने, आतंकियों की भर्ती कराने और पाकिस्तान से अल-बद्र की फंडिंग में अहम भूमिका निभाता था. गुलजार अहमद डार ने बताया कि उनके दूसरे बेटे शाहिद ने कथित तौर पर जम्मू कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन उन्हें इंटरव्यू में बैठने की अनुमति नहीं दी गई. शाहिद को 2022 में पुलवामा में गिरफ्तार किया गया और उसके ऊपर भी यूएपीए की धाराओं सहित कई आरोप लगाए गए और वह अभी भी हिरासत में है. शाहिद की बहन ने कहा कि हमारा भाई 4 साल से जेल में है, क्योंकि एक भाई आतंकी बन गया. 

हमजा का एक और भाई आरिफ गुलजार है. बताया जाता है कि वह भी पीएचडी स्कॉलर है, लेकिन उसे भी सरकारी नौकरी मिलने में समस्या आ रही है. उसके रत्नीपोरा वाले घर को भी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली संपत्ति बताते हुए जब्त कर लिया गया है. गुलजार परिवार ने अब जम्मू और कश्मीर प्रशासन से हमजा के भाइयों से जुड़े मामलों पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि उन्हें उन कार्यों के लिए भुगतना नहीं चाहिए जिनमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी. 

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पीओके में शिक्षक बनकर रह रहा था, कॉलेज के बाहर मारी गई गोली

रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों से वह पीओके में छिपकर रह रहा था और शिक्षक के रूप में काम कर रहा था. पुलिस का कहना है कि वह इस्लामाबाद से करीब 135 किलोमीटर दूर मुजफ्फराबाद के एक निजी कॉलेज में प्रिंसिपल के तौर पर कार्यरत था.

स्थानीय पुलिस के अनुसार गुरुवार सुबह जब वह कॉलेज परिसर से बाहर निकला, तभी अज्ञात हमलावरों ने उस पर नजदीक से फायरिंग कर दी. पाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उसके सिर में तीन गोलियां लगी थीं और गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां वेंटिलेटर पर रखा गया. बाद में उसकी मौत हो गई.

एक संदिग्ध गिरफ्तार

पुलिस ने दावा किया है कि मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि हमले में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

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