पाकिस्तान में ईंधन की आसमान छूती कीमतों, पेट्रोल पर भारी लेवी और बेकाबू महंगाई को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, शुक्रवार (7 अगस्त ) को देशभर में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे कई प्रमुख शहरों में आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया. जमात-ए-इस्लामी (JI) ने शरीफ सरकार से कहा कि अगर हमारी मांगे मानी नहीं गई, तो इससे बड़ा प्रदर्शन होगा.
पाकिस्तान में 500 से अधिक स्थानों पर चक्का जाम
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और एबटाबाद सहित प्रमुख शहरों में 500 से ज्यादा जगहों पर रैलियां और धरने आयोजित किए गए. प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों को बाधित कर दिया. हाथों में तख्तियां लिए लोगों ने सरकार की जनविरोधी टैक्स नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पेट्रोलियम लेवी को तुरंत वापस लेने तथा बढ़ती महंगाई से राहत देने की मांग की.
पाकिस्तान लंबे समय से रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रहा है. ईंधन के दामों में वृद्धि के कारण परिवहन लागत और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है.
‘तुम और IMF भाड़ में जाओ’ के लगे नारे
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की टैक्स नीतियों के खिलाफ तीखे नारे लगाए. हाथों में प्लेकार्ड लेकर लोगों ने पेट्रोलियम लेवी वापस लेने और महंगाई से राहत देने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान सरकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की नीतियों के खिलाफ भी नाराजगी देखने को मिली. ‘तुम और IMF भाड़ में जाओ’ जैसे नारे प्रदर्शनकारियों के गुस्से को जाहिर कर रहे थे.
यह सिर्फ एक ट्रेलर है, 9 अगस्त को बड़े आंदोलन का ऐलान
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने लाहौर में एक विशाल धरने को संबोधित करते हुए कहा कि शुक्रवार का प्रदर्शन तो केवल एक 'ट्रेलर' था, असली आंदोलन अभी शुरू होना बाकी है. उन्होंने घोषणा की कि विरोध के अगले चरण में 9 अगस्त को लाहौर में पंजाब के मुख्यमंत्री आवास और कराची, पेशावर व क्वेटा में गवर्नर हाउस के बाहर अनिश्चितकालीन धरने दिए जाएंगे. इसके लिए कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
आम जनता पर असहनीय बोझ और सरकार की तीखी आलोचना
जेआई प्रमुख ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि पेट्रोल लेवी और बिजली के भारी बिलों ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सत्ता में आई सरकारों ने जनता को राहत देने के बजाय हमेशा शक्तिशाली कुलीन वर्गों के हितों की रक्षा की है.
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