पीओके में 14000 और सैनिक तैनात कर रहा पाकिस्तान, भारत का कड़ा विरोध; पीएम मोदी से हस्तक्षेप की अपील, क्या है मामला?

PoK Heavy Military Deployment: पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून 2026 को विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा किया गया है. भारत ने चुनावों का कड़ा विरोध जताया है. वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है.

PoK Heavy Military Deployment: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में भारी सुरक्षा तैनाती हो रही है. भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया. यह विरोध पाकिस्तान द्वारा 7 जून 2026 को पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में तथाकथित ‘गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव’ कराने की योजना को लेकर किया गया. इस क्षेत्र के मानवाधिकार कार्यकर्ता ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि ये चुनाव ऐसे क्षेत्र में कराए जा रहे हैं जो भारत का अभिन्न हिस्सा है और जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है. भारत सरकार ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में हुए पूर्ण, वैध और अंतिम विलय के आधार पर भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. 

भारत बोला- अवैध कब्जे की सच्चाई नहीं बदल सकते चुनाव

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ऐसी गतिविधियां उन गंभीर समस्याओं को नहीं छिपा सकतीं जो उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद हैं. इनमें मानवाधिकारों का उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और लोगों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसी बातें शामिल हैं.

भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह पाकिस्तान द्वारा अपने कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति बदलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करती. भारत का कहना है कि ऐसे कदम इस सच्चाई को नहीं बदल सकते कि पाकिस्तान अभी भी भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा किए हुए है और उसे वहां से हट जाना चाहिए.

चुनाव से पहले 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा

इस बीच, मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने दावा किया कि पीओजेके में 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती हो रही है. मिर्जा की यह प्रतिक्रिया उस कथित पत्र के बाद आई है, जिसे 4 जून 2026 को पीओजेके के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) ने वहां के मुख्य सचिव को भेजा था. बताया जाता है कि इस पत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के नाम पर 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तत्काल तैनाती की मांग की गई थी.

‘दोहरी नीति और औपनिवेशिक सोच’ का आरोप

इस प्रस्ताव की निंदा करते हुए मिर्जा ने कहा कि इससे पाकिस्तान की ‘दोहरी नीति और औपनिवेशिक सोच’ उजागर होती है. उनका कहना है कि यह कदम पीओजेके के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उन आश्वासनों के विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि शांतिपूर्ण जन आंदोलनों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया जाएगा. 

मिर्जा ने कहा, ‘बाहरी खतरे की आशंका जताए जाने के केवल एक दिन बाद ही पाकिस्तान शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए बल प्रयोग की तैयारी करता दिखाई दे रहा है.’

पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग

मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करें. उनका आरोप है कि वहां मानवाधिकारों का व्यापक उल्लंघन हो रहा है और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर दबाव बढ़ाया जा रहा है.

मिर्जा के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक और नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है, हिरासत में रखा जा रहा है और कई तरह के दमन का सामना करना पड़ रहा है. 

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अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं की गिरफ्तारी का भी आरोप

उन्होंने दावा किया कि गिलगित-बाल्टिस्तान अवामी एक्शन कमेटी के कई नेताओं और सदस्यों को जेल में डाल दिया गया है ताकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक अधिकारों की मांग को दबाया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति संतोषजनक नहीं है. 

उनके अनुसार, 1947 से पाकिस्तान के कड़े नियंत्रण और लोगों पर लंबे समय से किए जा रहे प्रचार-प्रसार (ब्रेनवॉश) के बावजूद वहां के लोगों में इस्लामाबाद की नीतियों के प्रति गहरा असंतोष मौजूद है.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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