Pakistan Cash Crunch: नकदी संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान की सरकार ने देश में और ज्यादा इंफ्लेशन के साथ-साथ आर्थिक मंदी आने की चेतावनी जारी की है. एक समाचारपत्र में आज प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने दिन-ब-दिन बदतर होती आर्थिक स्थिति के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के साथ महत्वपूर्ण समझौते में देरी को जिम्मेदार ठहराया है. समाचार पत्र ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जारी अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा है कि राजनीतिक अस्थिरता ने मजबूत मुद्रास्फीति की संभावनाओं को बढ़ाना शुरू कर दिया है.
वर्तमान संकेतकों के आधार पर आर्थिक विकास दर की भविष्यवाणी
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने अर्थव्यवस्था के प्रति एक निराशाजनक दृष्टिकोण चित्रित करते हुए कहा कि- मासिक आर्थिक संकेतक और धीमा हो गया है. इस उपकरण की मदद से पिछले और वर्तमान संकेतकों के आधार पर आर्थिक विकास दर की भविष्यवाणी की जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी की तरह मार्च में भी इंफ्लेशन ऊपरी दायरे में रह सकता है. उसने हालांकि आकड़ा नहीं दिया लेकिन नकारात्मक कदमों के कारण बाजार में इंफ्लेशन के 36 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है. फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक रूढ़िवादी आंतरिक आकलन ने मार्च में लगभग 34 प्रतिशत इंफ्लेशन दर का आकलन किया. मंत्रालय ने कहा कि- बढ़ती इंफ्लेशन का एक संभावित कारण राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता है.
SBP की नीतियां भी इंफ्लेशन पर नियंत्रण पाने में नाकाम
मिनिस्ट्री ने यह भी कहा कि आर्थिक संकट बढ़ने के पीछे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) से 1.1 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मंजूरी में देरी भी कारक है. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) की नीतियां भी इंफ्लेशन पर नियंत्रण पाने में नाकाम रही हैं. मासिक रिपोर्ट में कहा गया कि रमजान के दौरान थोक में खरीद से मांग-आपूर्ति में अंतर हो गया है जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो गई है.
