Pakistan Double Earthquake: दुनिया इस महीने में भूकंप के प्रकोप का सामना कर रही है. 8 जून को फिलीपींस की धरती में हलचल मची. इसके बाद दो दिन पहले वेनेजुएला में अर्थक्वेक ने तबाही मचाई. अब पाकिस्तान में शनिवार को भूकंप के दोहरे झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई. हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस भूकंप से अभी तक किसी की मौत या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर सामने नहीं आई है.
यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित बरखान शहर से करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर था. इसकी गहराई धरती के अंदर लगभग 35 किलोमीटर दर्ज की गई. हालांकि, NCS ने भूकंप की गहराई 40 किलोमीटर बताई गई है. यह भूकंपीय हलचल भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 8:36 बजे महसूस की गई.
सुबह-सुबह आया पहला भूकंप
यह भूकंप ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में इससे कुछ घंटे पहले ही एक और झटका महसूस किया गया था. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि शुक्रवार शाम पाकिस्तान में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया था. NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि शनिवार को सुबह 6.15 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 75 किलोमीटर की गहराई में था.
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एक ही दिन में लगातार दो दिनों में भूकंप के झटकों के बाद लोगों में चिंता का माहौल है, हालांकि प्रशासन की ओर से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी गई है.
धरती पर भूकंप क्यों आते हैं?
धरती की ऊपरी सतह कठोर है, जिसे क्रस्ट कहा जाता है. यह कई विशाल और छोटे टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं. इसी क्रस्ट के नीचे धरती के अंदर गर्म तरल मैग्मा है. इसी मैग्मा पर ये प्लेट्स तैरती रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या इनके बीच दबाव बढ़ जाता है, तो अचानक इनमें हलचल होती है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है. यही ऊर्जा धरती की सतह पर कंपन पैदा करती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं. इन्हें इसके अलावा ज्वालामुखी गतिविधियां, बड़े बांधों का निर्माण और खनन के दौरान होने वाले विस्फोट जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे स्तर के भूकंप पैदा कर सकती हैं.
भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए आमतौर पर रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे मैग्नीट्यूड 1 से 10 तक के बीच संख्या में मापा जाता है. भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो कम समय में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती है. प्राथमिक (P) तरंगें और द्वितीयक (S) तरंगें भूकंप से पैदा होने वाली दो प्रमुख प्रकार की बॉडी वेव्स होती हैं.
P-वेव्स (Primary Waves) सबसे तेज गति से चलने वाली भूकंपीय तरंगें होती हैं. ये धरती के अंदर मौजूद पदार्थों को आगे-पीछे दबाकर और फैलाकर आगे बढ़ती हैं, ठीक उसी तरह जैसे ध्वनि तरंगें काम करती हैं. इनकी खास बात यह है कि ये ठोस, तरल और गैस तीनों तरह के माध्यमों से गुजर सकती हैं. ये सबसे पहले पहुंचती हैं.
S-वेव्स (Secondary Waves) की गति P-वेव्स की तुलना में धीमी होती है. ये जमीन को ऊपर-नीचे या एक तरफ से दूसरी तरफ हिलाने वाली गति पैदा करती हैं. S-वेव्स केवल ठोस पदार्थों के अंदर ही यात्रा कर सकती हैं और तरल माध्यम से नहीं गुजर पातीं. यह सबसे ज्यादा घातक होती हैं, क्योंकि यह बाद में पहुंचती हैं और धरती को ऊपर-नीचे हिलाती हैं.
भारत में हिमालयी क्षेत्र भूकंप के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील है. भारत में दिसंबर 2025 तक भूकंप के पांच जोन बनाए गए थे. लेकिन अब छठवां जोन (उच्चतम जोखिम) भी बना दिया गया है. इसमें पूरे हिमालयी क्षेत्र यानी जम्मू कश्मीर से पूर्वोत्तर भारत तक को रखा गया है. हिमालय विश्व के सबसे सक्रिय टकराव क्षेत्रों में से एक है. यह भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के अभिसरण (एक साथ मिलने या एक बिंदु पर घर्षण करने) के कारण बना है. दोनों प्लेटों के बीच प्रति वर्ष 5 सेमी का अभिसरण हो रहा है.
भारत के अन्य भूकंप जोन हैं
जोन V बहुत अधिक जोखिम: यह भारत का सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र है. इसमें कच्छ का रण (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे इलाके शामिल हैं, जहां बड़े भूकंप की संभावना अधिक रहती है.
जोन IV उच्च जोखिम: इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा काफी ज्यादा माना जाता है. इसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से शामिल हैं.
जोन III मध्यम जोखिम: इस श्रेणी में ऐसे इलाके आते हैं जहां भूकंपीय गतिविधि का खतरा मध्यम स्तर का है. इसमें केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण भारत के कुछ हिस्से शामिल हैं.
जोन II कम जोखिम: यह अपेक्षाकृत कम भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है. इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाकी हिस्से शामिल हैं.
जोन I नगण्य जोखिम: यह भारत का सबसे कम भूकंप जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता था. हालांकि, नए भूकंपीय वर्गीकरण में ज्यादातर ऐसे क्षेत्रों को अब ज़ोन II में शामिल कर दिया गया है.
पाकिस्तान भी भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है. यह भी वहीं है, जहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट एक-दूसरे से टकराती हैं. खासतौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाके फॉल्ट लाइनों के करीब होने के कारण अक्सर भूकंपीय हलचल का सामना करते रहते हैं.
