ईरान के न्यूक्लियर बम बनाने का कोई सबूत नहीं… तो ट्रंप ने हमला क्यों किया? IAEA डीजी ने बताई तेहरान की गलती

Iran Nuclear Bomb: ईरान के अब तक परमाणु हथियार बनाने का अब तक कोई सबूत नहीं मिला है, यह कमेंट किया है इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के डीजी ने. यह अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के बिल्कुल उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान को निशाना न बनाया गया होता, तो वह परमाणु हथियार बना लेता.

Iran Nuclear Bomb: ईरान के ऊपर 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर एयरस्ट्राइक कर दी. अमेरिका की ओर से आरोप लगाया गया कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना रहा है. आतंकवादियों को शह दे रहा है और घर के अंदर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं कर रहा है. हालांकि, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक ने यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के न्यूक्लियर वीपन वाले दावे से अलग राय रखी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के पास परमाणु-स्तर के यूरेनियम का बड़ा भंडार गंभीर चिंता का विषय है.

एक्स पर पोस्ट करते हुए IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने लिखा, ‘मैं अपनी रिपोर्टों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हमेशा स्पष्ट और एकसमान रहा हूं: अब तक ईरान द्वारा परमाणु बम बनाए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन लगभग हथियार-स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का उसका बड़ा भंडार और हमारे निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच देने से इनकार गंभीर चिंता का कारण है. जब तक ईरान IAEA को लंबित सुरक्षा संबंधी मुद्दों को सुलझाने में सहयोग नहीं करता, तब तक एजेंसी यह आश्वासन देने की स्थिति में नहीं होगी कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है.’

इससे पहले CNN को दिए एक इंटरव्यू में ग्रोसी ने कहा था कि IAEA को परमाणु हथियार बनाने के किसी व्यवस्थित कार्यक्रम के संकेत नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा, ‘हालांकि कई ऐसे तत्व थे जो गंभीर चिंता पैदा करते हैं. जैसे लगभग सैन्य-स्तर के बड़े पैमाने पर सामग्री का अनुचित भंडारण, निरीक्षण में पारदर्शिता की कमी आदि. लेकिन हमारे पास कभी ऐसी जानकारी नहीं थी जो यह दिखाए कि परमाणु हथियार बनाने का कोई संगठित, व्यवस्थित कार्यक्रम चल रहा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमें दोनों पक्षों को संतुलित ढंग से देखना होगा. हां, चिंता के कई कारण थे, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता था कि कल या परसों बम तैयार हो जाता. स्पष्ट रूप से, अमेरिका या इजरायल जैसे देश और संभवतः अन्य देशों को यह आभास हो सकता है कि ये गतिविधियां सीधे परमाणु हथियार निर्माण की ओर जा रही हैं. IAEA का काम मंशा का आकलन करना नहीं है. हां, चिंता के कारण थे, लेकिन समयसीमा को लेकर आकलन कुछ हद तक व्यक्तिपरक हो सकता है.’

ट्रंप ने क्या कहा था?

IAEA महानिदेशक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने अभी ईरान को निशाना नहीं बनाया होता, तो वह परमाणु हथियार हासिल कर लेता. ट्रंप ने ईरानी शासन को “पागल लोग” बताते हुए कहा कि यदि उनके पास परमाणु हथियार होता तो वे उसका इस्तेमाल कर चुके होते. मंगलवार रात (स्थानीय समय) प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, ‘अगर हम अभी जो कर रहे हैं, वह नहीं करते, तो परमाणु युद्ध हो जाता और वे कई देशों को तबाह कर देते. वे बीमार लोग हैं, मानसिक रूप से अस्थिर, गुस्से में और पागल. अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल कर चुके होते.’

रुबियो ने भी ट्रंप का किया समर्थन

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि जब कट्टरपंथियों के पास विनाशकारी हथियारों की पहुंच नहीं रहेगी, तब दुनिया ज्यादा सुरक्षित होगी. उन्होंने कहा, ‘ईरान कट्टर धार्मिक उन्मादियों द्वारा संचालित है. उनकी महत्वाकांक्षा परमाणु हथियार हासिल करने की है. वे मिसाइल, ड्रोन और आतंकवाद के कार्यक्रम की आड़ में इन्हें विकसित करना चाहते हैं, ताकि दुनिया उन पर कार्रवाई करने से डरे. यह उनका अब तक का सबसे कमजोर दौर है और अभी कार्रवाई करने का समय है.’

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रुबियो ने आगे कहा, ‘राष्ट्रपति ने उनके मिसाइल, नौसेना और ड्रोन क्षमताओं को खत्म करने का फैसला किया, ताकि वे कभी परमाणु हथियार न बना सकें. यही कारण है कि यह निर्णय लिया गया. यह सही फैसला था और जब ये कट्टर मौलवी इन हथियारों तक पहुंच खो देंगे, तब दुनिया ज्यादा सुरक्षित होगी. आप देख रहे हैं कि वे अभी इनका कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं. कल्पना कीजिए कि एक साल बाद अगर उनके पास और ज्यादा हथियार होते तो वे क्या करते.’

जंग की आग में झुलस रहा मिडिल ईस्ट

मिडिल ईस्ट में संघर्ष अब पांचवें दिन में पहुंच चुका है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में उसके सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई समेत कई नेताओं की मौत हुई है. इसके जवाब में तेहरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली परिसंपत्तियों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं. US-इजरायल के हमले में नेताओं के साथ आम लोगों की भी मौत हो रही है. लड़कियों के एक स्कूल में मिसाइल अटैक की वजह से 160 से अधिक लड़कियों की मौत हो गई. उनकी सामूहिक कब्र खोदी गई, जिसके बारे में ईरानी सिक्योरिटी काउंसिल के अध्यक्ष अली लाजीरानी ने पोस्ट करके जानकारी दी. 

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युद्ध के घातक परिणाम इजरायल और अमेरिका को भी भुगतने पड़ रहे हैं. ईरान ने मिडिल ईस्ट के अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाते हुए कई हमले किए हैं. इनमें बहरीन, यूएई, कुवैत, कतर और सऊदी अरब शामिल हैं. इन हमलों में अब तक 6 यूएस सैनिक मारे गए हैं. इसके अलावा इजरायल में भी ईरानी मिसाइल और ड्रोन अटैक से नुकसान हुआ है. सोमवार को बेत शेमेश में हुए हमले में 9 लोग मारे गए थे.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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