Nepal Floods : नेपाल में मरने वालों की संख्या 332 हुई, 30 से अधिक देशों के लोग लापता

तिब्बत में ग्लेशियर के ढहने से नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 332 लोगों की जान जा चुकी है और 1,300 से अधिक लोग लापता हैं.

नेपाल के पुलिस अधिकारियों ने वहां के अखबार काठमांडू टाइम्स को यह जानकारी दी है कि मरने वालोंं की संख्या 332 हो गई है. पुलिस ने बताया कि बुधवार को आई भयानक बाढ़ में जो लोग लापता हैं उनमें 30 से अधिक देशों के लोग शामिल हैं. यह आंकड़ा गुरुवार दोपहर 3:50 बजे तक का है.

नेपाल के आठ जिलों से बरामद हुईं हैं लाशें

नेपाल के जिन आठ जिलों से लाशें बरामद की गई हैं, उनकी संख्या इस प्रकार है. चितवन में 121, नवलपरासी ईस्ट में 74, धाडिंग और गोरखा में 29-29, नुवाकोट में 28, तनहुन में 19, रसुवा में 17 और नवलपरासी वेस्ट में 15 लाशें बरामद हुई हैं. सुबह जो जानकारी सामने आई थी उसके अनुसार जलप्रलय में मरने वालों की संख्या 289 बताई गई थी. बाढ़ के बाद से पुलिस और दूसरी सिक्योरिटी एजेंसियां ​​बाढ़ से प्रभावित जिलों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं. साथ ही सेना उन इलाकों से परिवारों को निकाल रही हैं जहां अभी बाढ़ का खतरा बना हुआ है.


लापता लोगों में पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल

लापता लोगों में बड़ी संख्या उन विदेशियों की है, जो ट्रैकिंग या पवित्र हिंदू धार्मिक स्थल की तीर्थयात्रा के लिए इस क्षेत्र में पहुंचे थे.अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में लापता लोगों की संख्या अलग हो सकती है. इसकी वजह आंकड़े जुटाने के तरीकों, रिपोर्ट किए जाने के समय और उनके सत्यापन में अंतर के साथ-साथ आंकड़े जुटाने वाले अधिकारियों और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चला रहे दलों के बीच समन्वय की कमी भी है. पीटीआई न्यूज ने विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया है कि लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक भी शामिल है. नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बृहस्पतिवार को बताया कि 517 विदेशी नागरिक लापता हैं. इनमें से 113 नेपाली पर्यटक, सेना और पुलिस के 85 जवान तथा रसुवा जिले के 161 निवासी और नुवाकोट जिले का एक व्यक्ति शामिल है.


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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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