जलाने के बदले दफनाया जा रहा नेपाल बाढ़ में जान गवाने वालों की लाश? ऐसा क्यों

नेपाल में बाढ़ त्रासदी के बाद बरामद हुए सैकड़ों अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है.शवगृहों में जगह की कमी और शवों के तेजी से सड़ने के बीच प्रशासन ने यह कदम उठाया है.

नेपाल में 26 अगस्त को आई भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों की विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में अब तक 1,003 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,916 से अधिक लोग अब भी लापता हैं.

हालात इतने खराब हैं कि बड़ी संख्या में मिले शवों की पहचान तक नहीं हो पा रही है और शवों को रखने की जगह कम पड़ रही है. ऐसे में जगह की कमी और शवों के तेजी से सड़ने के बीच प्रशासन ने अज्ञात शवों को दफनाना शुरू किया है.

सवाल ये है कि शवों को दफनाया क्यों जा रहा.जबकि उसे जलाया भी नहीं जा सकता है. क्या है इसके पीछे वजह?

सैकड़ों अज्ञात शव प्रशासन के बन रही चुनौती

  • नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ में पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे को तेज बहाव के साथ नीचे की ओर धकेल दिया है.
  • जिसके कारण इस तबाही में सिर्फ उजड़े घरों, टूटी सड़कों और बह गई बस्तियों तक सीमित नहीं है. बल्कि हजारों की संख्या में लोगों ने जान भी गवांई है.
  • नतीजा एक तरफ जहां कीचड़, चट्टानों और मलबे को हटाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ इस आपदा ने एक ऐसी मानवीय चुनौती भी खड़ी कर दी है, जिसका सामना करना प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है.
  • उनके लिए समस्या यह है कि कैसे लावारिस और अज्ञात शवों की पहचान कर और उसे सुरक्षित रखा जाए.

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शवों को दफनाया क्यों जा रहा

  • सरकारी आंकड़ों की मानें तो अब तक चितवन में सबसे ज्यादा 259 शव मिले है. इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 184, नवलपरासी पश्चिम में 82, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनहुँ में 36 और रसुवा में 13 शव मिले हैं.
  • हालांकि असली मुश्किल शवों की संख्या नहीं है. कई शव पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहे हैं, कुछ शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ मामलों में शरीर के अलग-अलग हिस्से ही बरामद हुए हैं. ऐसे में कई शवों की पहचान करना लगभग नामुमकिन सा है.
  • चितवन में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं. 29 अगस्त तक वहां 233 शव बरामद किए गए थे, जिनमें सिर्फ चार की पहचान हो पाई थी.
  • बाकी शव अस्पतालों और अस्थायी शव रखने वाले केंद्रों में रखे गए थे. लेकिन लगातार नए शव मिलने और पुराने शवों के तेजी से सड़ने के कारण इन केंद्रों की क्षमता जवाब देने लगी.
  • इसी वजह से प्रशासन ने चितवन के देवघाट इलाके में अज्ञात शवों को दफनाने का फैसला किया. यह फैसला नेपाल के अज्ञात और लावारिस शव प्रबंधन संबंधी निर्देश के तहत आपातकालीन कदम के तौर पर लिया गया है.

दफना कर शवों का अंतिम संस्कार कर रही प्रशासन ?

  • प्रशासन अज्ञात शवों को सिर्फ इसलिए दफना रहा है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से रखा जा सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट न पैदा हो. इसलिए दफनाने से पहले शवों के डीएनए नमूने, तस्वीरें, शारीरिक पहचान, कपड़े, आभूषण और दूसरी उपलब्ध जानकारियां रिकॉर्ड की जा रही हैं.
  • हर शव को एक अलग पहचान या ट्रैकिंग नंबर दिया जा रहा है. दफनाने की तारीख और कब्र की सही जगह का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। बाद में अगर किसी लापता व्यक्ति का परिवार सामने आता है, तो उसके डीएनए नमूने का मिलान इन रिकॉर्ड से किया जा सकता है.
  • अगर डीएनए जांच से पहचान पक्की होती है, तो संबंधित शव या अवशेष को कब्र से निकालकर परिवार को सौंपा जा सकता है, ताकि परिजन अपनी धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें.
  • 31 अगस्त तक चितवन में 199 अज्ञात शव दफन किए जा चुके थे और उनके डीएनए समेत पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित किए गए थे.

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परिवारों और संबंधियों के लिए दफनाया जा रहे शव

  • इस आपदा में कई परिवारों को यह तक पता नहीं है कि उनके लापता सदस्य कहां हैं. कुछ शव सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बहकर पहुंचे हैं. इसलिए किसी शव की पहचान सिर्फ उस जगह से करना भी संभव नहीं है जहां से वह मिला.
  • ऐसे में डीएनए जांच सबसे भरोसेमंद वैज्ञानिक तरीका बनती है. अधिकारियों के पास शव का डीएनए रिकॉर्ड रहेगा और लापता लोगों के परिजनों से लिए गए डीएनए नमूनों के साथ उसका मिलान किया जा सकेगा.
  • नेपाल के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं कि तेजी से सड़ रहे शवों से पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिम को रोकना और परिवारों के लिए भविष्य में पहचान का रास्ता खुला रखना.अज्ञात शवों को दफनाने की मौजूदा प्रक्रिया इसी संतुलन की कोशिश है.

यानी कि शवों को दफनाया जाना अंतिम संस्कार नहीं है. बल्कि डीएनए और दूसरे पहचान संबंधी रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि भविष्य में परिवार अपने लोगों की पहचान कर सकें.

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