Nepal Flood: सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

Nepal Flood: नेपाल की भीषण बाढ़ के बाद अब नजरें सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश पर टिक गई हैं. रसुवा और नुवाकोट की हाइड्रो प्रोजेक्ट से 500 से ज्यादा मजदूर लापता हैं. वहीं 275 से अधिक भारतीयों का भी सुराग नहीं मिला है. सेना भारी मशीनों के साथ बचाव अभियान चला रही है.

Nepal Flood: नेपाल में आई भयावह जलप्रलय के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचने की है. रसुवा और नुवाकोट जिलों की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 500 से ज्यादा कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. कई लोगों के परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा भारतीयों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है.

त्रिशूली-3ए की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश तेज

बाढ़ प्रभावित नुवाकोट में अपर त्रिशूली-3ए हाइट्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना ने बचाव अभियान तेज कर दिया है. सेना के इंजीनियर भारी मशीनों और विस्फोट की मदद से मलबे में दबे सुरंग के रास्ते को चौड़ा करने में जुटे हैं. नेपाल विद्युत प्राधिकरण (Nepal Electricity Authority) का अनुमान है कि 60 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में करीब 42 तकनीकी कर्मचारी भूमिगत बिजलीघर में मेंटेनेंस का काम कर रहे थे. इसी दौरान बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया.

सुरंग में बनाया छोटा रास्ता, लेकिन नहीं मिला जवाब

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक 90 सदस्यों वाली संयुक्त बचाव टीम घटनास्थल पर तैनात है. इसमें नेपाली सेना के 66 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 18 कर्मी और नेपाल पुलिस के छह जवान शामिल हैं.

रविवार दोपहर तक बचावकर्मी सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचे और करीब दो गुणा तीन फुट का रास्ता बनाया. इसके बाद जवान रस्सियों के सहारे अंदर उतरे और फंसे लोगों को आवाज लगाई, लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. अब रास्ते को और चौड़ा करने की कोशिश की जा रही है.

9 परियोजनाओं के 537 कर्मचारी अब भी लापता

नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट की नौ जलविद्युत परियोजनाओं के 537 कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद इन परियोजनाओं से कुल 898 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी. इनमें से 361 लोगों को अब तक बचा लिया गया है.

एक सुरंग में करीब 300 लोगों के फंसे होने की आशंका

सबसे गंभीर स्थिति रसुवा में स्थित 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में बताई जा रही है. यहां करीब 300 लोगों के परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं 22 मेगावाट की चिलिमे हाइड्रो प्रोजेक्ट में आठ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. परियोजना अधिकारियों को आशंका है कि इनमें से छह कर्मचारी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं.

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275 से ज्यादा भारतीय भी लापता

नेपाल में बाढ़ के बाद हजारों लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. अधिकारियों के मुताबिक देश में 591 विदेशियों समेत कुल 2,502 लोग अब भी लापता हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 से ज्यादा भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.

भारतीय और चीनी विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में शामिल

सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है. डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मचारियों और सुरंग विशेषज्ञ इंजीनियरों वाली 11 सदस्यीय भारतीय तकनीकी टीम ने प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों का निरीक्षण किया है. भारतीय विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इसके अलावा चीन के छह सुरंग विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचे हैं और नेपाली सेना की तकनीकी टीम के साथ बचाव की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं.

बाढ़ में अब तक 788 लोगों की मौत

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है. करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया था, जिसने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया.

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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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