नेपाल बाढ़ का दर्द: एक शव पर तीन परिवारों ने किया दावा, बोले- यही है हमारा अपना

Nepal Flood : नेपाल में विनाशकारी बाढ़ ने अपनों को खोने का दर्द और बढ़ा दिया. पोखरा के एक अस्पताल में एक ही शव पर तीन परिवारों ने अपना दावा कर दिया. सभी को लगा कि बाढ़ में लापता उनका परिजन मिल गया है. इस घटना ने आपदा के बाद मृतकों की सही पहचान करने की मुश्किल चुनौती को सामने ला दिया.

Nepal Flood : ‘नेपाल न्यूज’ की खबर के अनुसार पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी में रखे शव संख्या 1003 पर बर्दिया के जलविद्युत परियोजना कर्मचारी गोपाल दहित और रुपन्देही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल के परिवारों ने दावा किया. एक तीसरे परिवार ने भी शुरू में इस शव को अपने लापता परिजन का शव बताया था. शव की पहचान को लेकर असमंजस के बीच दोनों परिवार डीएनए जांच कराने पर सहमत हो गए हैं.

यह घटना बताती है कि बाढ़ के बाद अपनों की पहचान करना परिवारों और अधिकारियों के लिए कितना मुश्किल हो गया है. दूर-दराज के इलाकों से बरामद शवों को अस्पताल लाया जा रहा है. पहचान के लिए तस्वीर, शरीर की बनावट और कपड़ों या निजी सामान की मदद ली जा रही है. 26 अगस्त की बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अब भी लापता हैं.


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‘नेपाल न्यूज’ के अनुसार पोखरा में परिजन अस्पताल पहुंचकर अज्ञात शवों की तस्वीरें देख रहे हैं और चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, दांत, कान, होंठ के अलावा अन्य विशिष्ट पहचान चिह्नों की बारीकी से जांच कर रहे हैं.

16 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर में कहा गया है कि कि गोरखा, तनहुं, धादिंग और नवलपरासी पूर्वी जिलों से बरामद 102 शवों को पोखरा लाया गया है. पोखरा राजधानी काठमांडू से करीब 280 किलोमीटर दूर स्थित शहर है. अब तक 16 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया था, जबकि सोमवार सुबह तक 87 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका था. पहचान को लेकर दावों में विवाद के चलते पुलिस ने पांच परिवारों के परिजनों के डीएनए नमूने लिए थे.

एक शव पर दो परिवार का दावा

दहित परिवार के लिए तलाश तब शुरू हुई, जब जलविद्युत परियोजना में काम करने के लिए रसुवा गए गोपाल बाढ़ के दौरान लापता हो गए. ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, दहित की बहन मांजी थारू और अन्य परिजन बर्दिया से गैंदाकोट पहुंचे, जहां उन्हें बरामद शवों की तस्वीरें दिखाई गईं. उन्होंने शव संख्या 1003 की पहचान गोपाल के रूप में की. इसके बाद वे उन्हें घर ले जाने की उम्मीद में पोखरा पहुंचे. लेकिन परिवार के शव लेने से पहले ही दामोदर बस्याल के परिजनों ने भी उस शव पर अपना दावा कर दिया.


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बस्याल के परिवार ने कहा कि शव की कई शारीरिक विशेषताएं उनके लापता परिजन से मेल खाती हैं. वहीं, दहित के परिवार ने कहा कि शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, छाती और चेहरा गोपाल से मेल खाते हैं. दोनों परिवार इस विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए जांच कराने पर सहमत हो गए. एक अन्य मामले में एक परिवार ने पांच वर्षीय बच्चे की पहचान उसके पास मौजूद सामान के आधार पर की.

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By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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