Nepal Flood : रसुवा में अब तक 289 शव बरामद, शवगृहों की कमी और पहचान बनी बड़ी चुनौती

Nepal Flood : नेपाल के रसुवा में आयी भीषण बाढ़ के बाद शव मिलने का सिलसिला लगातार जारी है. अब तक 289 शव बरामद किये जा चुके हैं. बाढ़ के तेज बहाव में शव दूर-दूर तक बह जाने के कारण उनकी खोज और शिनाख्त का काम बेहद मुश्किल हो गया है.

नेपाल से मनोज गुप्ता की रिपोर्ट

Nepal Flood : पर्याप्त शवगृह (मॉर्च्युरी) की सुविधा न होने से शवों के सुरक्षित रख-रखाच की चुनौती बढ़ गयी है. चितवन के स्वास्थ्य संस्थानों में अधिकतम 50 शव रखने की ही क्षमता है, जबकि बरामद शवों की संख्या इससे कई गुना अधिक है.

त्रिवि शिक्षण अस्पताल के वरिष्ठ फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ गोपाल चौधरी के अनुसार, "इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के दौरान शव मिलते ही जल्दबाजी में अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए. शव की पहचान और उससे जुड़े सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. प्रत्येक शव को अलग नंबर देकर टैग किया जाना चाहिए. इसके साथ ही शव मिलने का स्थान, समय, कपड़े, गहने, शरीर के विशेष पहचान चिह्न और फोटो सहित संपूर्ण विवरण दर्ज किया जाना चाहिए."

रेफ्रिजरेशन सुविधा वाले कंटेनरों को भी अस्थायी शव भंडारण केंद्र बनाया जा सकता है

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बड़ी संख्या में शव मिलने पर अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर वैज्ञानिक तरीके से शवों को दफनाकर संरक्षित किया जा सकता है. इसके अलावा, रेफ्रिजरेशन सुविधा वाले बड़े कंटेनरों को भी अस्थायी शव भंडारण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां एक कंटेनर में लगभग 50 शव रखे जा सकते हैं.

डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन टीम का गठन जरूरी

फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ हरिहर वस्ती ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा में शव प्रबंधन का काम किसी एक अस्पताल या चिकित्सक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. इसके लिए तत्काल डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन टीम गठित की जानी चाहिए, जिसमें फोरेंसिक डॉक्टर, पुलिस, दंत चिकित्सक (डेंटल एक्सपर्ट), फिंगरप्रिंट और डीएनए विशेषज्ञ शामिल हों. जिन शवों की स्थिति ठीक है, उनकी पहचान परिजनों, कपड़ों, गहनों या टैटू के आधार पर की जा सकती है. हालांकि, अत्यधिक क्षत-विक्षत या सड़े-गले शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, दांतों की जांच और डीएनए परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना वैज्ञानिक पुष्टि के परिजनों को शव सौंपने या जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने से गलत पहचान का बड़ा खतरा रहता है. बाढ़ के शव चितवन से लेकर नवलपरासी तक के विस्तृत क्षेत्रों में मिल रहे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार को स्थानीय और प्रांतीय सरकारों के साथ समन्वय बनाकर तुरंत अस्थायी शव भंडारण केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

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एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

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