Nepal Flood : नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) तड़के अचानक आयी तेज बाढ़ का असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिला. हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है, जब नेपाल में इस तरह का मंजर देखने को मिल रहा है. इससे पहले भी नेपाल तेज भूकंप और भीषण बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को दर्द झेल चुका है.
- 1934 का नेपाल-भारत भूकंप : 15 जनवरी 1934 को दोपहर करीब 2:13 बजे 8.0 मैग्नीटयूड का भूकंप आया. केंद्र : पूर्वी नेपाल में माउंट एवरेस्ट से करीब 9.5 किमी दक्षिण में स्थित. उत्तरी बिहार और नेपाल में व्यापक तबाही मची.
- 1988 में भूकंप से हिला था नेपाल : 20 अगस्त 1988 को नेपाल-भारत बार्डर के पास भूकंप आया. केंद्र : उदयपुर जिला(नेपाल), नेपाल और बिहार में मरने वालों की संख्या 1003 तक पहुंच गयी. -स्कूलों, अस्पतालों सहित कई इमारतें और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हुए. लगभग पांच लाख लोग बेघर हुए, स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ.
- 1993 में नेपाल का विनाशकारी बाढ़ : 19-20 जुलाई 1993 को हुई भारी बारिश ने विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन. मूसलाधार बारिश ने करमैया में प्रमुख जलविद्युत जलाशय, बागमती बैराज को प्रभावित किया और 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई.
- अप्रैल 2015 का नेपाल भूकंप : 25 अप्रैल 2015 नेपाल भूकंप को गोरखा भूकंप के रूप में भी जाना जाता है. केंद्र : गोरखा जिले के पूर्व में बारपाक गांव था, जो काठमांडू से लगभग 85 किमी उत्तर-पश्चिम में है. इस भूकंप ने नेपाल, भारत, चीन और बांग्लादेश में 8,962 लोगों की जान ले ली और 21,952 घायल हो गये.
- 2014 का नेपाल सुनकोशी भूस्खलन : अगस्त 2014 में जुरे गांव में भीषण लैंडस्लाइड हुआ, जिसने सुनकोशी नदी का रास्ता रोककर आर्टिफिशियल झील बना दी थी. इसमें 150 से अधिक लोग मारे गये थे वहीं, अप्रैल 2014 में खुंबू आइसफॉल पर आये हिमस्खलन में 16 शेरपा गाइडों की मौत हो गयी थी.
- 2023 का भूकंप : 3 नवंबर 2023 को नेपाल के जाजरकोट में आयी 5.7 तीव्रता की भूकंप में 153 लोगों की मौत हो गयी थी. वहीं, कम से कम 375 घायल हो गये. भूकंप को पश्चिमी नेपाल और उत्तरी भारत में व्यापक रूप से महसूस किया गया था, और यह 2015 के बाद से देश में आया सबसे घातक भूकंप है.
- 2024 में आयी बाढ़ से भारी तबाही : 2017 में मॉनसून के दौरान आयी बाढ़ ने पूरे दक्षिण नेपाल (तराई क्षेत्र) को डुबो दिया था, जिसमें 140 से अधिक मौतें हुईं और लाखों लोग प्रभावित हुए. इसके बाद साल 2024 के सितंबर में काठमांडू घाटी और बागमती प्रांत में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के कारण आयी बाढ़ और भूस्खलन में 240 से अधिक लोगों की जान चली गयी.
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