North Korea Nuclear Program: एक ओर ईरान को न्यूक्लियर प्रोग्राम आगे बढ़ाने पर जंग झेलनी पड़ रही है. आर्थिक बदहाली और अमेरिका-इजरायल के मिसाइल और ड्रोन हमले से तेहरान हलकान है. देश की लीडरशिप के साथ जनता भी मारी जा रही है. वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया रुक ही नहीं रहा. उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है. देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का दौरा किया. उन्होंने संकेत दिया कि प्योंगयांग अपने परमाणु हथियार भंडार को पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है.
नए परमाणु केंद्र पहुंचे किम जोंग उन
दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से बताया कि बुधवार को किम जोंग उन ने हाल ही में शुरू किए गए एक परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का निरीक्षण किया. इस दौरान उनके साथ सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. हालांकि उत्तर कोरिया ने इस केंद्र का सटीक स्थान या उससे जुड़ी अन्य तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल उत्तर कोरिया के प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र योंगब्योन, कुसोंग और कांगसोंग में मौजूद हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जिस केंद्र का दौरा किया गया, वह इन्हीं में से कोई है या कोई चौथा गुप्त केंद्र भी संचालित किया जा रहा है.
पांच साल में दोगुनी हुई उत्पादन क्षमता का दावा
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान हथियार-ग्रेड परमाणु सामग्री तैयार करने की देश की क्षमता दोगुने से भी अधिक बढ़ी है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय उत्तर कोरिया के परमाणु वैज्ञानिकों को देते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां और संभावित सुरक्षा चुनौतियां देश के परमाणु प्रतिरोधक तंत्र को और मजबूत बनाने की मांग करती हैं. किम ने कहा कि गुणवत्ता और संख्या, दोनों स्तरों पर परमाणु क्षमता का विस्तार तेज गति से जारी रहना चाहिए.
परमाणु बलों को मजबूत करने पर हुई अहम बैठक
परमाणु केंद्र के दौरे के दौरान उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु बलों को और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक भी आयोजित की. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में किम जोंग उन ने परमाणु हथियार कार्यक्रम के विस्तार से जुड़ी नई कार्ययोजना और दिशा-निर्देश जारी किए.
उन्होंने कहा कि परमाणु गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों को अपडेट किया गया है और अब देश ने अपनी परमाणु शक्ति को कई गुना गति से बढ़ाने की प्राथमिकताएं भी तय कर ली हैं. किम ने इस कदम को एक “ऐतिहासिक घटना” बताया और कहा कि इससे उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमताओं के आधुनिकीकरण में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है.
तस्वीरों में दिखीं यूरेनियम संवर्धन मशीनें
केसीएनए द्वारा जारी तस्वीरों में लंबे हॉल के भीतर लाइन से बेलनाकार सेंट्रीफ्यूज दिखाई दिए हैं. इन मशीनों का उपयोग यूरेनियम एनरिचमेंट की प्रक्रिया में किया जाता है, जो परमाणु ईंधन और हथियार-ग्रेड सामग्री तैयार करने का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है.
एक अन्य तस्वीर में किम जोंग उन के सामने रखी मेज पर कुछ दस्तावेज भी दिखाई दिए, जिन्हें उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ा माना जा रहा है. हालांकि तस्वीर में उन दस्तावेजों की सामग्री धुंधली कर दी गई थी.
पहले भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर दिया था बड़ा संदेश
इस वर्ष फरवरी में आयोजित वर्कर्स पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर कोरिया ने खुद को “अपरिवर्तनीय परमाणु शक्ति” घोषित करने की नीति दोहराई थी. उस दौरान देश ने पांच वर्षीय सैन्य आधुनिकीकरण योजना के तहत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया था.
इसके कुछ महीने पहले, सितंबर 2024 में, उत्तर कोरिया ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने यूरेनियम संवर्धन केंद्र की तस्वीरें जारी की थीं. उस समय भी प्योंगयांग ने यूरेनियम संवर्धन के लिए इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूजों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था.
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दुनिया को क्या संदेश?
किम जोंग उन के ताजा बयान और परमाणु केंद्र के दौरे को उत्तर कोरिया की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इससे संकेत मिलता है कि प्योंगयांग अपने परमाणु कार्यक्रम को पीछे हटाने के बजाय उसे और व्यापक तथा आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है, क्योंकि उत्तर कोरिया लगातार अपनी परमाणु क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख आधार बताता रहा है. उत्तर कोरिया आए दिन अपने मिसाइल टेस्ट करता रहता है. बीते महीनों में उसने जापान की दिशा में भी मिसाइल टेस्ट किए थे. हालांकि, ये मिसाइलें जापान की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के पहले ही गिरे थे. दक्षिण कोरिया को भी हमेशा उत्तर कोरिया से डर लगा रहता है.
