Italy Giorgia Meloni Iran War: इटली और अमेरिका के बीच फ्रांस में हुए G7 समिट के बाद तनाव खुलकर दिखा, जब यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और इटालियन पीएम जॉर्जिया मेलोनी सोशल मीडिया पर भिड़ गए. अब इटली ने ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध अभियान से खुद को पूरी तरह अलग करने की कोशिश की है. नाटो महासचिव मार्क रुटे के एक बयान के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सफाई देनी पड़ी. उन्होंने कहा कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया था और नाटो प्रमुख के बयान से देश की भूमिका को लेकर गलत संदेश गया.
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नाटो चीफ मार्क रुटे ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि संघर्ष के दौरान इटली ने करीब 500 अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देकर बड़ी भूमिका निभाई थी. उनके इस बयान के बाद इटली में विपक्षी दलों ने मेलोनी सरकार को घेर लिया. विपक्ष का कहना था कि सरकार पहले लगातार यह कहती रही कि इटली युद्ध से दूर रहा, जबकि नाटो प्रमुख कुछ और तस्वीर पेश कर रहे हैं.
मेलोनी बोलीं- इटली ने सिर्फ तकनीकी और लॉजिस्टिक सहयोग दिया
विपक्ष के आरोपों के बाद दक्षिणी फ्रांस में आयोजित फ्रांस-इटली शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि मार्क रुटे के बयान से यह गलत धारणा बनी कि इटली की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर सीधे हमले करने के लिए किया गया था, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ.
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार पहले ही कह चुकी थी कि इटली में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से केवल वही लॉजिस्टिक और तकनीकी उड़ानें संचालित होने दी जाएंगी, जिनकी अनुमति अमेरिका और इटली के बीच मौजूद द्विपक्षीय समझौते के तहत है.
पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘महासचिव ने अपने उत्साह में ऐसी चीजों को एक साथ जोड़ दिया जो वास्तव में अलग-अलग थीं. उन्होंने अलग-अलग तरह की अधिकृत उड़ानों को एक जैसा बताकर भ्रम पैदा कर दिया.’
मेलोनी बोलीं- हमने ईरान के खिलाफ युद्ध में हिस्सा नहीं लिया
प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि इटली किसी भी तरह से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था. उन्होंने कहा, ‘हमने ईरान के साथ हुए संघर्ष में भाग नहीं लिया. अगर हमने ऐसा किया होता तो अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार जिस निराशा का जिक्र कर रहे हैं, उसकी कोई वजह ही नहीं होती.’
मेलोनी ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि मार्क रुटे ने इटली की भूमिका को इतना सरल बनाकर क्यों पेश किया. उनके मुताबिक, ‘संभव है कि उन्होंने आगामी NATO शिखर सम्मेलन के लिए सहयोगियों की एकजुटता दिखाने की कोशिश की हो, लेकिन ऐसे संवेदनशील मामलों में बेहद सावधानी बरतनी चाहिए.’
इटालियन विदेश मंत्री ने अराघची से की बात
इस मामले पर इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने भी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की और इस मुद्दे पर रोम का रुख साफ किया. ताजानी ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इटली ने कभी भी किसी सैन्य पहल में भाग नहीं लिया है.
उन्होंने आगे कहा कि इटली ने ईरान के खिलाफ युद्ध कार्रवाई के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी भी नहीं दी. इसके साथ ही उन्होंने ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को पूरी तरह खोलने की अपील की, ताकि वहां फंसे इटली के मालवाहक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो सके.
इटली के रक्षा मंत्री ने भी सैन्य उड़ानों को लेकर दी सफाई
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान इटली के सिगोनेला और एवियानो सैन्य ठिकानों से गुजरने वाली उड़ानों की संख्या साल 2019 से 2025 के बीच दर्ज उड़ानों की तुलना में काफी कम थी. उन्होंने कहा कि ये आधिकारिक रक्षा आंकड़े हैं और जरूरत पड़ने पर इनके सटीक आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
NATO ने भी दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि मार्क रुटे का इशारा केवल उन तकनीकी और लॉजिस्टिक सुविधाओं की ओर था जो पहले से लागू द्विपक्षीय समझौतों के तहत उपलब्ध थीं. उनका आशय यह बिल्कुल नहीं था कि इटली ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमलों में भाग लिया.
ईरान ने कहा- दूसरे देश को हमला करने के लिए जमीन देना आक्रामक कार्रवाई
इस पूरे विवाद के बीच ईरान ने इटली और रोमानिया को लेकर कड़ा बयान दिया. ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों) काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि अगर कोई देश किसी तीसरे देश को किसी अन्य देश के खिलाफ हमला करने के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराता है तो यह भी आक्रामक कार्रवाई मानी जाती है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी इस मामले पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि नाटो महासचिव के बयान में इटली और रोमानिया का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया है और उन्हें ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल बताया गया है.
ट्रंप लगातार करते रहे हैं इटली की आलोचना
इटली और विशेषकर मेलोनी की यह सफाई ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इटली के रुख की आलोचना कर रहे हैं. पिछले कुछ हफ्तों में ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि यूरोपीय सहयोगियों ने ईरान पर दबाव बनाने और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के अमेरिकी प्रयासों में पर्याप्त साथ नहीं दिया.
हाल ही में ट्रंप ने NATO में इटली की भूमिका पर भी सवाल उठाए. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘NATO पर खरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी इटली और उसकी प्रधानमंत्री इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के गंभीर परमाणु खतरे के खिलाफ हमारे साथ आने को तैयार नहीं हुए. दशकों से हम उनकी सुरक्षा करते आए हैं, लेकिन जब हमारी बारी आई तो वे हमारे साथ खड़े नहीं हुए. यह अच्छी बात नहीं है.’
इससे पहले ट्रंप ने यह दावा भी किया था कि मेलोनी सरकार ने अमेरिका को इटली के रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी. इससे हमारी लॉजिस्टिक व्यवस्था प्रभावित हुई, जबकि अमेरिका हर साल इटली और अन्य तथाकथित NATO सहयोगियों की सुरक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करता है.
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G7 समिट में क्या हुआ था, जिसने बढ़ाई ट्रंप-मेलोनी की तल्खी?
ट्रंप ने दावा किया था कि G7 बैठक के दौरान जॉर्जिया मेलोनी बार-बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जता रही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता घट रही है और ईरान पर उनका रुख उनकी राजनीतिक मुश्किलों की वजह बना है.
मेलोनी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया. उन्होंने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप के ये बयान पूरी तरह मनगढ़ंत हैं. मुझे सचमुच हैरानी होती है कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं. यह पहली बार भी नहीं है.’
ट्रंप के लगातार हमलों का जवाब देते हुए मेलोनी ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप, आपकी ये लगातार और बिना वजह की जाने वाली टिप्पणियां बिल्कुल निरर्थक हैं. जहां तक मेरी लोकप्रियता का सवाल है, वह आपके साथ मेरे रिश्ते पर निर्भर नहीं करती. मेरी लोकप्रियता इस बात पर टिकी है कि मैं इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती हूं और मैं हमेशा यही करती रहूंगी.’
