Video : बम गिरा और उसका ब्रेन बाहर आ गया, एक फिलिस्तीनी बच्चे ने रोते हुए बताई रूह कंपाने वाली सच्चाई...

इजरायल और हमास युद्ध के दौरान जिस तरह की त्रासदी लोग झेल रहे हैं वह किसी भी तरह मानवता के लिए सही नहीं है. फिलिस्तीनी बच्चे का यह वायरल वीडियो इसी सच्चाई को बयां कर रहा है.

इजरायल और हमास के ताजा युद्ध में सबसे दयनीय स्थिति किसी की हुई है, तो वे हैं बच्चे. सात अक्टूबर को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो इसे 50 साल में इजरायल पर हुए हमले में सबसे खतरनाक बताया गया . इस हमले के बाद इजरायल लगातार गाजापट्टी पर हमले कर रहा है. चूंकि गाजापट्टी हमेशा से कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों को भी झेलता रहा है इसलिए यहां के आम लोगों की स्थिति बदतर है. हमेशा युद्ध झेलता यह क्षेत्र और यहां के लोग अभाव की जिंदगी ही जीते आए हैं. लेकिन अभी इजरायल और हमास युद्ध के दौरान जिस तरह की त्रासदी लोग झेल रहे हैं वह किसी भी तरह मानवता के लिए सही नहीं है. फिलिस्तीनी बच्चे का यह वायरल वीडियो इसी सच्चाई को बयां कर रहा है.


फिलिस्तीनी बच्चे पर खौफ हावी

इन दिनों एक फिलिस्तीनी बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो हमले की त्रासदी को बताता दिख रहा है. बच्चे का मासूम चेहरा अपने दुख को बयां कर रहा है. वह बिलख रहा है और बता रहा है कि किस तरह बमबाजी हो रही है. वह किस तरह गेंद लेने कार के नीचे गया था और वहां उसका भतीजा बमबाजी में घायल हो गया. जबकि उसके पड़ोस के एक बच्चे का सिर हमले में उड़ गया और उसका ब्रेन खोपड़ी से बाहर आ गया. बच्चा कहता है कैसे हम यहां रहें, यह कोई जीवन है. बच्चे की आवाज कांप रही है और खौफ उसके चेहरे पर है. वह जिस त्रासदी को बयां कर रहा है वह रूह कांपने वाली है.

गाजापट्टी में नाकाबंदी 

चौथे जिनेवा सम्मेलन के अनुच्छेद 55 के अनुसार गाजा की आबादी को भोजन, दवाएं और अन्य बुनियादी सामान मिले यह सुनिश्चित करना शामिल है, लेकिन हमास के हमले के बाद इजरायली सरकार ने गाजापट्टी में नाकाबंदी कड़ी कर दी है ताकि नागरिक आबादी को जीवित रहने के लिए जरूरी वस्तुओं से भी वंचित कर दिया जाए. यह स्थिति बच्चों के लिए बहुत खतरनाक है, क्योंकि वयस्क लोगों की अपेक्षा बच्चे भोजन और पानी की कमी को नहीं झेल पाते हैं. उसपर स्थिति यह है कि वे अपने घर के बाहर खेल भी नहीं पा रहे हैं. इजरायल और हमास युद्ध के राजनीतिक मायने तो कई हैं, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस हमले से बच्चे बुरी तरह प्रभावित हैं और उनका पूरा व्यक्तित्व से इससे भविष्य में प्रभावित होगा.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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