Israel Hamas War: अब दो दिन के बाद इजराइल बरसाएगा गाजा पर बम

Israel Hamas War: कतर ने सीजफायर समझौते की अवधि को दो और दिन बढ़ाए जाने की घोषणा की है. इजराइली बमबारी और जमीनी हमले के कारण फिलिस्तीन के 23 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. सीजफायर समझौते के बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद वहां के लोगों को कुछ राहत मिली है.

Israel Hamas War: इजराइल और हमास अपने सीजफायर समझौते की अवधि को दो और दिन बढ़ाने पर सोमवार को सहमत हो गए. इसके बाद आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाकर रखे गए लोगों और इजराइल की जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की अदला-बदली जारी रहने की संभावनाएं बढ़ चुकी है. आपको बता दें कि हमास ने मूल रूप से चार दिवसीय सीजफायर समझौते के तहत अदला-बदली के चौथे दौर में 11 इजराइली महिलाओं एवं बच्चों को रिहा किया. ये बंधक छूटने के बाद सोमवार रात को इजराइल पहुंचे. इसके अलावा इजराइल द्वारा रिहा किए गए 33 फलस्तीनी कैदी मंगलवार तड़के वेस्ट बैंक के रामल्ला में पहुंचे थे. आपको बता दें कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीजफायर खत्म होने के बाद युद्ध जारी रखने की बात कह चुके हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि हमास की सैन्य क्षमताओं को नष्ट किया जाएगा और गाजा में उसके 16 साल लंबे शासन को समाप्त किया जाएगा. नेतन्याहू ने 240 बंधकों को मुक्त करने का वादा किया है. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से न्यूज एजेंसी एपी ने यह जानकारी दी है. मंत्रालय ने बताया कि इजराइल-हमास के बीच सीजफायर फायर को अगले दो दिन के लिए बढ़ाने पर सहमति बन चुकी है. यहां चर्चा कर दें कि इजराइल और हमास के बीच सीजफायर फायर के लिए वार्ता में मिस्र के साथ कतर प्रमुख मध्यस्थ रहा है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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