डोनाल्ड ट्रंप और उनके दोस्त से नाराज है इजरायल, गाजा-ईरान को लेकर अमेरिकन पॉलिसी है वजह

इजरायल अमेरिका की ईरान और गाजा को लेकर उसकी नीति से खुश नहीं है. उसका मानना है कि गाजा के पीस बोर्ड के मेंबर्स में किसी इजरायली प्रभाव डालने वाले इजरायली व्यक्ति को शामिल नहीं किया है. वहीं ईरान पर अमेरिका ने ऐन वक्त पर हमला टाल दिया. इसके पीछे इजरायल स्टीव विटकाफ को जिम्मेदार मान रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा पीस प्लान के दूसरे फेज के लिए बोर्ड ऑफ पीस बना रहे हैं. इसमें उन्होंने दुनिया के कई लीडर्स को शामिल किया है. उनके दामाद जेरेड कुश्नर और भारतीय मूल के वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा भी इसका हिस्सा हैं. लेकिन इजरायल ट्रंप के इस बोर्ड के एक सदस्य से नाराज है. इजरायल की नाराजगी इस बोर्ड के स्ट्रक्चर को लेकर भी है. इसके साथ ही ईरान पर संभावित हमले के मुद्दे पर भी इजरायल का ट्रम्प प्रशासन के साथ मतभेद बढ़ रहा है. इजरायल के अधिकारियों ने इन फैसलों के पीछे एक प्रमुख व्यक्ति की ओर इशारा किया है. 

इजरायल उसे अपने हितों (इंट्रेस्ट) के खिलाफ मान रहा है. यह कोई और नहीं ट्रंप के दोस्त और गाजा पीस प्लान के विशेष दूत (Special Envoy) स्टीव विटकॉफ हैं. हाल ही में हमास और स्टीव विटकाफ के बीच मुलाकात होने वाली थी. इसे इजरायली दबाव के कारण रद्द किया. इजरायल ने अमेरिका के ऊपर कूटनीतिक दबाव बनाया, जिसकी वजह से ऐसा हो पाया. इजरायली अधिकारियों ने विटकॉफ के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही असंतोष का इजहार किया है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू के करीबी सूत्रों ने शनिवार शाम को i24NEWS से इस बारे में बात की. 

i24NEWS के अनुसार, उन्होंने चैनल से कहा पिछले कई महीनों से यह भावना रही है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के मिडिल ईस्ट में अपने निजी कारणों से निर्णय ले रहे हैं. वह हमास के साथ मजबूत संपर्क हैं. उनकी ओर से कई बार निर्णय लेते समय इजरायली हित वास्तव में प्राथमिकता नहीं पाते. यह आलोचना गाजा के एडमिनिस्ट्रेशन में तुर्की और कतर को शामिल करने से जुड़े हैं. इजरायल के अनुसार बोर्ड में इन दोनों देशों को शामिल के प्रस्ताव और ईरान से जुड़े खतरे, दोनों को लेकर उसे चिंता है. एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह सामने आता है कि ईरान पर हमले को रोकने वालों में वह भी शामिल हैं, तो यह महज एक संयोग से कहीं ज्यादा होगा. 

ईरान को लेकर इजरायल की क्या समस्या है?

पिछले हफ्ते बुधवार तक अमेरिका ईरान पर हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका था. साउथ चाइना सी से यूएसएस अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया था. इजरायल के प्रधानमंत्री का प्लेन भी ग्रीस लैंड कर चुका था. ईरान में विरोध प्रदर्शनों के कारण हमला करने का पूरा माहौल बन गया था. अमेरिका के मिडिल ईस्ट में सबसे बड़े एयर बेस- कतर के अल उदैद से अधिकतर अमेरिकी सैनिक हट गए थे. ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारी प्रोटेस्ट जारी रखें, मदद पहुंच रही है. लेकिन ऐन मौके पर सारा माहौल बदल गया. 

ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकने पर धन्यवाद देने लगे. हालांकि, ये अलग बात है कि अगले ही दिन उन्होंने खामेनेई को बीमार आदमी बताकर शासन से बाहर करने की भी बात कही. लेकिन मेन बात रही कि अमेरिका ने ईरान पर हमला नहीं किया. लगता है यह इजरायल को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है. अमेरिका ने हमला क्यों नहीं किया, इस पर कई बातें सामने आईं, जैसे अरब के चार देशों- सऊदी अरब, कतर, इजिप्ट और ओमान ने इसमें इंटरफेयर किया और अमेरिका को हमला करने से रोक लिया. फांसी रुक गई, पुतिन ने ईरान और इजरायल दोनों से बात की. अमेरिका को ईरान में सफलता न मिलने का डर. ईरान की कार्रवाई की वजह से मिडिल ईस्ट में पीस बिगड़ने का खतरा. कारण कोई भी हो, इजरायल की नाराजगी विटकाफ को लेकर है. 

गाजा को लेकर इजरायल की समस्या क्या है?

गाजा पीस प्लान के दूसरे फेज के लिए संस्थापक कार्यकारी बोर्ड मुख्य (पीस बोर्ड) बनाया गया है, जो गाजा में शांति आने तक शासन की निगरानी करेगा. इस बोर्ड के 7 सदस्य हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अमेरिका के विशेष दूत (स्पेशल एनवॉय) स्टीव विटकॉफ, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अन्य अमेरिकी/अंतरराष्ट्रीय सदस्य भी इसमें शामिल हैं, जिनके बारे में अभी नहीं बताया गया है. 

इसके साथ ही गाजा कार्यकारी बोर्ड का भी गठन किया गया है. यह बोर्ड गाजा में रोजमर्रा के प्रशासन, सेवाओं और स्थिरता से जुड़ा काम देखेगा. इस बोर्ड में शामिल प्रमुख सदस्य हैं, स्टीव विटकॉफ, जैरेड कुशनर (ट्रंप के दामाद), टोनी ब्लेयर (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री), हकान फिदान (तुर्की के विदेश मंत्री), अली अल-थवादी (कतर के सीनियर डिप्लोमैट) हैं. कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय अधिकारी, अलग-अलग देशों से हैं. इसमें केवल एक इजरायली अरबपति कारोबारी याकिर गाबे को जगह दी गई है. 

विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि अमेरिका ने गाजा के भविष्य से जुड़े एक अहम बोर्ड का गठन किया, लेकिन इसमें इजरायल सरकार से कोई सलाह नहीं ली. इजरायल का कहना है कि गाज़ा उसकी सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है, इसलिए बिना उसकी सहमति के ऐसा फैसला लेना गलत है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू नाराज हैं क्योंकि बोर्ड में तुर्की और कतर जैसे देशों को शामिल किया गया है. यह पहले से ही इजरायल के खिलाफ बयान देते रहे हैं और इनके हमास से संबंध माने जाते हैं.

दूसरी वजह यह है कि इस पूरे ढांचे में किसी भी इजरायली सरकारी अधिकारी को जगह नहीं दी गई, जबकि तुर्की और कतर को अहम भूमिका दी गई है. इजरायल को डर है कि अगर ऐसे देश गाजा के फैसले लेंगे, तो हमास को पूरी तरह हटाना मुश्किल हो जाएगा. इसी कारण इजरायल इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है और अमेरिका से औपचारिक विरोध जता रहा है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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