Ron Arad: इजरायली सेना की स्पेशल टुकड़ी लेबनान में घुसी और एक गांव के कब्रिस्तान को खोदने लगी. सुनने में अजीब लग सकता है. इस स्पेशल ऑपरेशन के लिए आम दिमाग अंदाजा लगा सकता है कि शायद हथियार ढूंढे जा रहे होंगे या फिर हिज्बुल्लाह का कोई लांचिंग पैड या कुछ और. लेकिन इजरायल के एक्शन की बात हो और अचंभे वाली बात न हो, ऐसा नहीं हो सकता. इजरायली सेना 40 साल पहले अपने एक सैनिक की कब्र खोद रहे थे. इसका गुप्त कार्रवाई का मकसद इजरायली वायुसेना के नेविगेटर रोन अराद के अवशेषों का पता लगाना था.
अक्टूबर 1986 में इजरायल और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष के दौरान एक इजरायली विमान को लेबनान के ऊपर मार गिराया गया था. उस घटना के बाद विमान के नेविगेटर रोन अराद लापता हो गए थे. अराद को खोजने के लिए इजरायल ने दूसरे देश में खुफिया ऑपरेशन ही कर दिया. गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनका विमान गिरने के बाद अमल मूवमेंट नामक शिया मिलिशिया गुट ने उन्हें पकड़ लिया और हिज्बुल्लाह को सौंप दिया था.
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने शुक्रवार रात इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. अभियान के दौरान लेबनानी सेना और हिज्बुल्लाह के लड़ाकों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन कोई इजरायली सैनिक घायल नहीं हुआ. हालांकि, इस साहसिक कार्रवाई के बावजूद अराद के अवशेषों से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि खोज अभी जारी रहेगी.
बेका घाटी में कब्रिस्तान की जांच
रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल की यह कार्रवाई बेका घाटी के नाबिशीत गांव में हुई, जहां देर रात 10 बजे चार हेलीकॉप्टरों के जरिए इजरायली कमांडो पहुंचाए गए. स्थानीय लोगों के मुताबिक सैनिकों को रस्सियों के सहारे जमीन पर उतारा गया, जिसके बाद वे गांव के कब्रिस्तान में पहुंचे और एक संदिग्ध स्थान पर खुदाई करने लगे. इजरायल का मानना है कि संभवतः वहीं रोन अराद को दफनाया गया था. स्थानीय लोगों ने बताया कि एक कब्र के पास ताजा खोदी गई मिट्टी भी दिखाई दी.
हालांकि, कमांडो थोड़ी देर खुदाई करने के दौरान ही इजरायली बलों पर हिज्बुल्लाह और लोकल लोगों ने हमला किया. इसकी वजह से इजरायली बलों को भागना पड़ा. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने इस हमले का जवाब दिया, यह लड़ाई सुबह 3 बजे तक चली. हालांकि, हमला गंभीर होने पर इजरायली बलों को लौटना पड़ा. लेकिन इस कार्रवाई में 3 लेबनानी सैनिक और 41 स्थानीय लोग मारे गए, लेबनान के स्वास्थ्य विभाग ने यह दावा किया.
किसकी कब्र खोद रहे थे इजरायली अधिकारी?
नबी चित में इजरायली बलों द्वारा खोदी गई कब्र के समाधि-पत्थर की एक तस्वीर से पता चला कि वह हुसैन शुक्र नाम के व्यक्ति की कब्र थी. इसी इलाके से लेबनान के सेवानिवृत्त जनरल सिक्योरिटी अधिकारी अहमद शुक्र को भी अगवा कर लिया गया था. बताया जाता है कि कुछ अज्ञात लोग उन्हें एक संपत्ति दिखाने के बहाने ग्रामीण बेका घाटी में ले गए थे.
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लेबनानी अधिकारियों को शक था कि यह अपहरण इजरायली खुफिया एजेंसी की कार्रवाई हो सकती है और पूछताछ के लिए उन्हें इजरायल ले जाया गया होगा. दरअसल इजरायली एजेंसी को संदेह था कि उनके भाई हसन का संबंध उस घटना से था जिसमें रोन अराद को पकड़ने में भूमिका होने की आशंका जताई जाती रही है.
1986 से बना हुआ है रहस्य
लेबनान के इस क्षेत्र में यह धारणा है कि 1986 में विमान दुर्घटना के कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई थी. उन्हें बेका घाटी के आसपास कहीं दफना दिया गया था. हालांकि उनकी कब्र का सटीक स्थान आज तक पता नहीं चल पाया है. चार दशक बीत जाने के बाद भी इजरायल उनके शव की तलाश में जुटा हुआ है. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने बताया था कि 2021 में अराद की लाश का पता लगाने के लिए, सीरिया से एक ईरानी सैन्य अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया था.
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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद सहित कई एजेंसियां लेबनान और आसपास के क्षेत्रों में सुराग ढूंढने की कोशिश करती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी अराद के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हिज्बुल्लाह से जुड़े कुछ लोगों को इजरायली एजेंटों ने हिरासत में लिया था. लेबनान में मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बावजूद इजरायली अधिकारियों का कहना है कि लापता पायलट को खोजने का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है.
