Iran Sanctions: अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीने से जारी युद्ध अब आर्थिक दबाव और सैन्य टकराव के एक और खतरनाक दौर में पहुंचता दिख रहा है. अमेरिका ने ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है, तो तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि नई धमकी मिली तो उसका जवाब बेहद विनाशकारी होगा. ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि देश अमेरिकी दबाव का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.
ईरानी मीडिया के मुताबिक अब्दुल्लाही ने कहा, 'जमीन, समुद्र, हवा, वायु रक्षा और साइबरस्पेस में पूरी तैयारी के साथ ईरान की सेनाएं दुश्मन की नई धमकियों का करारा, दंडात्मक और तबाह करने वाला जवाब देंगी.' युद्ध में ईरान की अर्थव्यवस्था और पारंपरिक सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है. इसके बावजूद उसके पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों और अन्य क्षेत्रीय ठिकानों को खतरा बना हुआ है.
ट्रंप बोले- ईरान अभी 'सही समझौते' के लिए तैयार नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान अभी उस समझौते के लिए तैयार नहीं है, जिसे वह सही मानते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य विकल्प सीमित हो गए हैं, तो ट्रंप ने कहा, 'इसका मतलब सिर्फ इतना है कि हम देख रहे हैं कि क्या होता है.'
होर्मुज को लेकर उन्होंने कहा, 'हमारे पास उस पूरे क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट शामिल है और यह नियंत्रण जमीन के इलाकों तक है.' ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनके मुताबिक वह अभी सही समझौते के लिए तैयार नहीं है.
साउथ कैरोलिना के मर्टल बीच में एक रैली के दौरान ट्रंप ने फिर कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने कहा, 'हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते. अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हुआ तो बहुत बुरा होगा.'
उन्होंने दावा किया, 'हम वहां गए और उन्हें रोक दिया, उनके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा.' होर्मुज पर ट्रंप ने बेहद असाधारण दावा करते हुए कहा, 'मैं अभी होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र मानता हूं, यह अमेरिकी क्षेत्र है.'
अमेरिका लगाएगा इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि नए प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सोमवार को दी जाएगी. उनका कहना है कि यह ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. बेसेंट ने कहा, 'यह एक-दो का हमला है. हमारे पास नाकेबंदी है और अब हम इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं. हम इस शासन को ध्वस्त कर देंगे.'
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद या राहत दे रहे हैं. ऐसे देशों पर भी आर्थिक कार्रवाई की संभावना जताई गई है.
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चीन ने अमेरिका की रणनीति पर उठाए सवाल
ईरान का सबसे बड़ा समुद्री तेल खरीदार चीन है. केप्लर के डेटा के मुताबिक, 2025 में ईरान से समुद्र के रास्ते भेजे गए तेल का 80 फीसदी से ज्यादा चीन गया था. अमेरिकी दबाव के बीच चीन ने वॉशिंगटन की नीति का विरोध किया है. वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा, 'प्रतिबंध और दबाव समस्या का समाधान करने में मदद नहीं करते.' चीन ने बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है.
ईरान ने माना- प्रतिबंध अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे
ईरानी नेतृत्व लगातार अमेरिका को चुनौती दे रहा है, लेकिन देश की आर्थिक मुश्किलों को भी स्वीकार कर रहा है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने इराक में कहा, 'हमें अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों से निपटने की योजना बनानी होगी, ताकि हम उन्हें पार कर सकें.'
उन्होंने यह भी चेताया कि सिर्फ सैन्य ताकत से देश नहीं चल सकता. उन्होंने कहा कि हमारे पास कितनी भी सैन्य ताकत क्यों न हो, अगर लोग भूखे हैं और वित्तीय गतिविधियां, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय उत्पादन नहीं है तो हम टिक नहीं पाएंगे.
ईरान पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करता रहा है, लेकिन अब महंगाई, कमजोर मुद्रा, ऊर्जा संकट और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
युद्ध से बढ़ी ट्रंप की घरेलू मुश्किलें
ईरान को भारी नुकसान पहुंचने के बावजूद ट्रंप अपने सभी घोषित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हैं. इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और वहां की धार्मिक लीडरशिप को हटाना शामिल है.
युद्ध ने ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं और अमेरिका में ट्रंप की लोकप्रियता पर भी असर डाला है. इस सप्ताह के रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे कम अप्रूवल दर्ज किया गया. अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी के बाद शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
होर्मुज में स्थिति सामान्य नहीं
अमेरिका और ईरान अप्रैल और जून में दो बार युद्धविराम की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन होर्मुज में सामान्य शिपिंग बहाल करने की कोशिशें अब तक नहीं शुरू हो पाई है. केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को सिर्फ 7 मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरे.
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता था. लेकिन अब यहां जहाजों की आवाजाही काफी घट गई है. ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य करने के लिए अलग-अलग बातचीत की है. वहीं अमेरिका ऐसे किसी समझौते के खिलाफ है जिसमें जहाजों पर शुल्क लगाया जाए.
फिलहाल अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि वह प्रतिबंधों का सामना कर सकता है. साथ ही तेहरान ने साफ कर दिया है कि दबाव और बढ़ा तो इसका जवाब सैन्य कार्रवाई के रूप में भी सामने आ सकता है.
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