Iran US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को दिये गये 48 घंटे के अल्टीमेटम की मियाद कल यानी 6 अप्रैल को पूरी होने वाली है. ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान तय समय के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को नहीं खोलता, तो उसे विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप की इस कड़ी चेतावनी का ईरान पर कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा. उल्टा, तेहरान ने इस अल्टीमेटम को सिरे से खारिज कर दिया है और बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने ट्रंप की चेतावनी को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है. ईरानी सेना के सबसे अहम रणनीतिक ढांचे में शामिल खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय को लीड कर रहे जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने ट्रंप के बयान को बेबस, घबराई हुई, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण करार दिया है.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दी चेतावनी
ट्रंप की धमकी पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कड़ी चेतावनी दी है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो पूरा क्षेत्र गंभीर संकट में फंस सकता है. ईरानी सेना के प्रमुख मुख्यालय खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि यदि टकराव और बढ़ा, तो मध्य पूर्व अमेरिका और इजरायल के लिए नरक साबित हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को कमजोर समझना या उसे हराने का सपना देखना अमेरिका और इजरायल के लिए भारी पड़ सकता है और वे खुद गहरे संकट में फंस सकते हैं. जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए इजराइल और अमेरिका से जुड़े कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है.
ट्रंप के अल्टीमेटम के आखिरी 48 घंटे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (4 अप्रैल) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बेहद सख्त संदेश दिया था. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था. समय तेजी से बीत रहा है, 48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा. ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि वो अब अपने पहले के कूटनीतिक रुख से हटकर अधिक आक्रामक और दबाव वाली रणनीति तेवर अपना रहे हैं.
मिडिल ईस्ट में छिड़ सकती है और बड़ी लड़ाई
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने अचानक से हमला शुरू कर दिया था. इसके बाद से ईरान का भी पलटवार जारी है. वो अरब के खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर रहा है. साथ ही इजराइल पर भी मिसाइल और ड्रोन अटैक जारी है. ऐसे में अगर अल्टीमेटम की मियाद पूरी होने के बाद अमेरिका ईरान पर कोई बड़ा हमला करता है तो होर्मुज स्ट्रेट समेत पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ी लड़ाई छिड़ सकती है. युद्ध के दौरान होर्मुज बंद होने के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है. पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है. युद्ध शुरू होने के पहले जिस ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, अब वह बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल को भी पार कर चुकी है.
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