Iran Slams Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो और बातचीत का हिस्सा शेयर किया था. इसमें रेडियो होस्ट माइकल सैवेज ने भारत और चीन को ‘नरक’ (Hell-hole) कहा था. सैवेज ने अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के कानून पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लोग भारत-चीन जैसे देशों से अमेरिका सिर्फ इसलिए आते हैं ताकि उनके बच्चों को वहां की नागरिकता मिल सके. ट्रंप के इस पोस्ट को शेयर करने के बाद बड़ा विवाद शुरू हो गया.
ईरान ने ऐसे लिया मजे
मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास (Consulate General) ने ट्रंप पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में महाराष्ट्र की खूबसूरती, मुंबई की भागदौड़, गणेश चतुर्थी का त्योहार, सतारा के पठार और तापी नदी की शांति को दिखाया गया है. ईरान ने कहा कि ट्रंप को ‘सांस्कृतिक डिटॉक्स’ (मन की शांति) के लिए एक बार महाराष्ट्र जरूर आना चाहिए.
‘असली नरक वहां है जहां युद्ध अपराधी रहते हैं’
हैदराबाद में मौजूद ईरान के दूतावास ने भी भारत और चीन का बचाव किया. उन्होंने कहा कि ये दोनों देश दुनिया की पुरानी सभ्यताओं का जन्मस्थान रहे हैं. ईरान ने सीधे ट्रंप पर हमला करते हुए कहा कि असली ‘नरक’ वो जगह है, जहां का राष्ट्रपति ईरान की सभ्यता को खत्म करने की धमकी देता है. उन्होंने ट्रंप के पुराने बयानों की ओर इशारा करते हुए उन्हें ‘युद्ध अपराधी’ तक कह दिया.
भारत के विदेश मंत्रालय का कड़ा जवाब
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ट्रंप द्वारा शेयर की गई बातों को पूरी तरह गलत और खराब बताया है. मंत्रालय ने कहा कि यह कमेंट हकीकत से कोसों दूर है और भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों के हिसाब से बिल्कुल ठीक नहीं है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के रिश्ते आपसी सम्मान पर टिके हैं और ऐसी बातें किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हैं.
अमेरिकी दूतावास ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने मामले को संभालने की कोशिश की. दूतावास की तरफ से बयान आया कि ट्रंप भारत को एक ‘महान देश’ मानते हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि भारत के प्रधानमंत्री ट्रंप के बहुत अच्छे दोस्त हैं. यह सफाई उन आरोपों को कम करने के लिए दी गई जो माइकल सैवेज के शो ‘सैवेज नेशन’ के बाद शुरू हुए थे.
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जन्म से नागरिकता पर बहस
पूरा विवाद माइकल सैवेज के उस दावे से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने कहा था कि नौ महीने की गर्भवती महिलाएं अमेरिका सिर्फ नागरिकता के लिए आती हैं. सैवेज ने मांग की थी कि इस कानून को कोर्ट के भरोसे छोड़ने के बजाय जनता की राय (Referendum) से तय करना चाहिए. ट्रंप ने इसी बातचीत को सपोर्ट करते हुए शेयर किया था, जिस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है.
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