होर्मुज खोलने को तैयार हुआ ईरान, लेकिन अमेरिका के सामने रख दी यह दो शर्त

Iran US Conflict: ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया है कि वो होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए खोलने को तैयार है, लेकिन इसके बदले अमेरिका को अपनी नाकाबंदी और जंग खत्म करनी होगी. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करता है तो वो होर्मुज को फिर से खोल देगा.

Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल शांति है. लेकिन, हालात काफी तल्ख हैं. ईरान के तटों पर अमेरिकी नाकाबंदी है. अमेरिकी युद्धपोत फारस की खाड़ी में हजारों सैनिकों के साथ तैनात हैं. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका उसकी दो शर्त मान लेता है तो वो होर्मुज खोल देगा. ईरान ने कहा कि उसकी पहली शर्त है कि अमेरिका अपनी नाकेबंदी खत्म करे और दूसरी, युद्ध समाप्त किया जाए. इसके अलावा ईरान ने यह भी सुझाव दिया है कि उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े बड़े मुद्दे पर बातचीत बाद के चरण में की जाएगी.

क्या ईरान का प्रस्ताव मानेंगे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान के प्रस्ताव को मानेंगे इसकी संभावना कम ही मानी जा रही है. क्योंकि इससे वे मतभेद अनसुलझे रह सकते हैं जिनके कारण 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए. दूसरी बात कि ईरान ने शर्त के जरिये साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे पर बाद में बात की जाएगी. यानी ईरान परमाणु मुद्दे को टालने की कोशिश कर रहा है, जबकि ट्रंप इस मुद्दे को बिल्कुल ढील देने के मूड में नहीं हैं.

होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है. यह रास्ता युद्ध से पहले तेल और गैस सप्ला का एक महत्वपूर्ण मार्ग था. ऐसे में अमेरिकी नाकेबंदी का मकसद ईरान को तेल बेचने से रोकना है, ताकि उसकी आय कम हो और उसे उत्पादन रोकने के लिए मजबूर किया जा सके. इससे अलावा होर्मुज बंद होने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. तेल की कीमतें आसमान छूने लगी है. जंग के कारण कच्चे तेल की कीमत 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर एक सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है. कई देशों में तेल और गैस की घोर किल्लत है.

पाकिस्तान कर रहा है मध्यस्थता

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की कड़ी पाकिस्तान बना हुआ है. ईरान ने यह शर्त भी पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति तक पहुंचाई है. न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्यस्थता प्रयासों में शामिल अधिकारियों ने बताया कि ईरान नई वार्ता से पहले अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने पर जोर दिया है.

अधर में अटकी दूसरे दौर की बातचीत

अमेरिकी और ईरान के बीच पहले दौरी की बातचीत 11 और 12 अप्रैल को हुई थी. 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा रही. अब पाकिस्तान फिर से तेहरान और वाशिंगटन के बीच रुकी हुई वार्ता को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटा हुआ है. लेकिन, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद की यात्रा रद्द कर दी, जिससे दूसरे दौर की बातचीत अधर में लटक गई. हालांकि, ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के अधिकारी (ईरान-अमेरिका) फोन पर बातचीत कर सकते हैं.

ईरान के विदेश मंत्री की रूस यात्रा और कूटनीतिक प्रयास

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) रूस की यात्रा पर हैं. सोमवार (27 अप्रैल) को उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से मुलाकात की. पुतिन ने ईरान के संघर्ष की सराहना की और मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया. पुतिन ने यह भी कहा कि ईरान के हितों के रक्षा करने की रूस पूरी कोशिश करेगा.

ईरान-अमेरिका, इजराइल-लेबनान युद्ध में सैकड़ों लोगों की मौत

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में कम से कम 3,375 लोग और लेबनान में 2,509 लोग मारे गए हैं. इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्ला के बीच भी संघर्ष जारी है. इजराइल में 23 और खाड़ी अरब देशों में 12 से अधिक लोग मारे गए. इसके अलावा, लेबनान में 15 इजराइली सैनिक, क्षेत्र में 13 अमेरिकी सैनिक और संयुक्त राष्ट्र के छह शांति सैनिकों की भी मौत हुई है.

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By Pritish Sahay

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