Iran: 28 फरवरी को ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था. इस हमले में करीब 170 बच्चों और टीचर्स की जान चली गई थी. अब ईरान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर दो अमेरिकी नेवी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके नाम और तस्वीरें सार्वजनिक कर दी हैं.
ईरान ने इन दो अधिकारियों को बताया ‘अपराधी’
भारत, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में मौजूद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिकी नेवी के दो अफसरों की फोटो जारी की है. ईरान के मुताबिक, ये अधिकारी यूएसएस स्प्रुअंस जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ली आर टेट और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर जेफरी ई यॉर्क हैं. ईरान का आरोप है कि इन दोनों ने ही तीन बार टॉमहॉक मिसाइलें दागने का ऑर्डर दिया था, जिससे स्कूल में पढ़ रहे मासूम बच्चे मारे गए.
ईरान का दावा: जानबूझकर किया गया हमला
24 मार्च 2026 को जिनेवा में आयोजित UN मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 58वें सत्र के दौरान हुई डिबेट में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि मिनाब में ‘शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल’ पर हुआ हमला कोई गलती नहीं थी, बल्कि यह एक नरसंहार था जिसे पूरी योजना बनाकर अंजाम दिया गया था. उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए कहा कि अमेरिका जैसे एडवांस सिस्टम वाले देश से ऐसी गलती होना नामुमकिन है. हमले में 170 से ज्यादा छात्र और शिक्षक मारे गए थे.
अमेरिकी जांच: पुरानी जानकारी की वजह से हुई गलती
दूसरी तरफ, द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी मिलिट्री की शुरुआती जांच में इसे एक बड़ी चूक बताया जा रहा है. रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी सेना का निशाना स्कूल के पास मौजूद एक मिलिट्री बेस था. स्कूल की बिल्डिंग पहले उसी बेस का हिस्सा थी. पुराने मैप और डेटा का इस्तेमाल करने की वजह से मिसाइल गलती से स्कूल पर जा गिरी. हालांकि, अमेरिकी अधिकारी अभी इसकी पूरी जांच कर रहे हैं कि बिना वेरिफिकेशन के स्ट्राइक का फैसला क्यों लिया गया.
ट्रंप ने शक जताया था कि इस हमले के पीछे है ईरान का हाथ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इस हमले के पीछे ईरान का ही हाथ होने का शक जताया था, लेकिन बाद में कहा कि वे जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे. वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इस घटना को बेहद खौफनाक बताया है. चीन और क्यूबा जैसे देशों ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है. चीन ने बिना सुरक्षा परिषद की मंजूरी के हमला करने के लिए अमेरिका और इजरायल की आलोचना भी की है.
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जंग के बीच गहराता मानवीय संकट
यह हमला 28 फरवरी को तब हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. इसके बाद ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों पर पलटवार किया, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है. इस बीच, हमले में अपने दो बच्चों को खोने वाली मोहद्देसे फलाहत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्याय की गुहार लगाई है. फिलहाल ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार मान रहे हैं, जबकि इजरायल ने इसमें अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है.
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