Iran-Israel War: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिका और इजरायल की कड़ी निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) संघर्ष के बीच दोनों देश हिंसा के जरिए ज्ञान और शिक्षा को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. अराघची ने अमेरिका और इजरायल को ‘पार्टनर-इन-क्राइम’ यानी अपराध में भागीदार बताते हुए कहा कि ईरानी यूनिवर्सिटीज और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन पर हमले करना उनकी मजबूती नहीं, बल्कि हताशा और डर को दिखाता है.
वैज्ञानिकों और संस्थानों पर हमलों की बात कही
अराघची ने अपने बयान में कहा कि इजरायल और उसके साथी को लगता है कि बमबारी करके ज्ञान को खत्म किया जा सकता है. उन्होंने ईरान के वैज्ञानिकों की हत्या और परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अब यूनिवर्सिटीज को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये हरकतें केवल ईरान के लोगों को ज्ञान हासिल करने के लिए और ज्यादा प्रेरित करेंगी.
30 दिनों में इन यूनिवर्सिटीज को बनाया निशाना
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने भी X पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि पिछले 30 दिनों के युद्ध के दौरान ‘इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी’ और तेहरान की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ जैसे बड़े संस्थानों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है. बक़ाई के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ईरान की वैज्ञानिक बुनियाद और कल्चरल हेरिटेज को कमजोर करना चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताना सिर्फ एक बहाना है, असली मकसद ईरान के बौद्धिक विकास को रोकना है.
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IRGC की चेतावनी
ईरानी मीडिया ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) के टेलीग्राम चैनल के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. IRGC ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरानी शिक्षण संस्थानों पर हमले जारी रखते हैं, तो पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी और इजरायली यूनिवर्सिटीज को भी निशाना बनाया जा सकता है.
IRGC ने साफ कहा है कि इन यूनिवर्सिटीज के स्टाफ और छात्र सुरक्षित रहने के लिए कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें. इसके साथ ही एक डेडलाइन भी दी गई है. बयान के अनुसार, अगर अमेरिका सोमवार, 30 मार्च (तेहरान के समय अनुसार दोपहर 12 बजे तक) ईरानी यूनिवर्सिटीज पर हुई बमबारी की आधिकारिक तौर पर निंदा नहीं करता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है.
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