मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से जुड़े केंद्रों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया.एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान की इस कार्रवाई की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ली है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह हमला अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया.
ट्रंप का सख्त जवाब, बोले- करारा जवाब देंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान को कड़ा जवाब देगा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने अधिकांश मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया और अमेरिकी सैनिकों ने बेहद कम समय में जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर ली थी. ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका अब बड़े सैन्य अभियान से पीछे नहीं हटेगा.
ईरान की IRGC ने अपने बयान में कहा कि जब तक अमेरिका ईरान के खिलाफ कार्रवाई और धमकियां बंद नहीं करता, तब तक उसका प्रतिरोध जारी रहेगा. ईरान ने अमेरिका पर अपने हितों में अवैध हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और कहा कि वह हर हमले का जवाब देगा.
इराक में भी अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई
इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर संयुक्त सटीक हवाई हमले किए. इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण और ड्रोन हमलों की तैयारी के लिए किया जा रहा था. अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में उसके ठिकानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए, जिन्हें नाकाम कर दिया गया.
पूरे मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा
लगातार मिसाइल हमलों, जवाबी हवाई कार्रवाई और दोनों देशों की आक्रामक चेतावनियों के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका और गहरा गई है. अमेरिका ने साफ कहा है कि यदि ईरान समर्थित समूहों ने हमले नहीं रोके, तो और भी कठोर सैन्य कार्रवाई की जाएगी. वहीं ईरान ने भी पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
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