US-Iran War : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है. ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो तेल टैंकरों को भी रोकने दावा किया है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं और इससे ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है.
अमेरिका का जवाब- होर्मुज की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी हमलों का लक्ष्य ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, वायु रक्षा प्रणाली और समुद्री सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड कहना है कि इन कार्रवाइयों का मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है.
पुरानी दुश्मनी फिर बनी बड़े संकट की वजह
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है. साल 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे. इसके बाद कई बार खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों को निशाना बनाने, ड्रोन हमलों और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. उधर, 8 जुलाई 2026 को दोनों देशों के बीच शुरू हुई सैन्य झड़पों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है.
दुनिया की नजर होर्मुज पर, भारत भी सतर्क
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी उछाल देखने को मिला है, जिसका असर भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है.
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