15 अगस्त भारत के इतिहास में बेहद खास तारीख है. 1947 में इसी दिन भारत ने करीब दो सदियों के ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल की. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की आजादी की तारीख से जुड़ी एक और कहानी एशिया के दूसरे हिस्से की भी है? हमसे दो साल पहले, यानी 15 अगस्त 1945 को एशिया महाद्वीप के एक और देश ने विदेशी शासन से आजादी हासिल की थी. वह देश था- कोरिया.
15 अगस्त 1945 को कोरिया ने जापानी शासन से मुक्ति पाई थी. हालाँकि, कोरिया की आजादी की यह खुशी ज्यादा समय तक एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में नहीं टिक सकी. बिल्कुल भारत की ही तरह, जो भारत और पाकिस्तान नाम के दो देशों में बंटते हुए स्वतंत्र हुआ. वहीं, कोरिया आजादी के कुछ वर्षों बाद दो अलग-अलग देशों- उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में बंट गया. इस विभाजन के पीछे द्वितीय विश्व युद्ध, अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बढ़ता कोल्ड वॉर और कोरियाई प्रायद्वीप की बदलती राजनीति बड़ी वजह बनी.
35 साल की गुलामी और आजादी
20वीं सदी की शुरुआत में कोरिया पर जापान का साम्राज्यवादी कब्जा हो गया था. 1910 से लेकर 1945 तक कोरियाई लोगों ने जापानी शासन के अधीन अत्यंत क्रूरता, सांस्कृतिक दमन और अत्याचार का सामना किया. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कोरियाई नागरिकों ने अपनी स्वतंत्रता के लिए कड़ा संघर्ष किया.
15 अगस्त 1945 को जब द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया, तो कोरिया भी जापानी नियंत्रण से मुक्त हो गया. 15 अगस्त को जापान के सम्राट हिरोहितो ने रेडियो प्रसारण के जरिए इसकी घोषणा की थी और 2 सितंबर 1945 को टोक्यो खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस मिसौरी पर औपचारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस ऐतिहासिक दिन (15 अगस्त) को कोरिया में 'ग्वांगबोकजियोल' (Gwangbokjeol) कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'रोशनी की बहाली का दिन'.
एक राष्ट्र से दो देशों में विभाजन
जापान से मुक्ति मिलते ही कोरिया के सामने नया संकट खड़ा हो गया. द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में दो महाशक्तियों- सोवियत संघ (USSR) और अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की योजना बनाई. प्रायद्वीप को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया:
उत्तर कोरिया: यह सोवियत संघ के प्रभाव में आया, जहाँ साम्यवादी (कम्यूनिस्ट) शासन की नींव पड़ी.
दक्षिण कोरिया: यह अमेरिका के प्रभाव में रहा, जहाँ पूंजीवादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई गई.
दोनों के बीच, वैचारिक मतभेद इतने बढ़ गए कि 1948 में उत्तर में 'डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (उत्तर कोरिया) और दक्षिण में 'रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (दक्षिण कोरिया) की औपचारिक स्थापना हुई. विभाजन के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया.
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विभाजन का दर्द और कोरियाई युद्ध
1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण पर हमला कर कोरियाई युद्ध छेड़ा दिया. तीन साल तक चले इस खूनी संघर्ष में लाखों लोग मारे गए. 1953 में युद्धविराम हुआ, लेकिन बिना किसी स्थायी शांति के. दोनों कोरिया के बीच एक विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) बना हुआ है, जो दुनिया की सबसे तनावपूर्ण सीमाओं में से एक माना जाता है.
दोनों देशों में अब जमीन-आसमान का अंतर
आज जहाँ दक्षिण कोरिया दुनिया की शीर्ष आर्थिक और तकनीकी महाशक्तियों में शुमार है, वहीं उत्तर कोरिया एक अलग-थलग और सख्त सैन्य शासन वाला देश है. दक्षिण कोरिया में जनता के पास आजादी है, जबकि उत्तर के लोगों का जीवन जेल जैसा. दोनों तरफ के लोग एक ही भाषा, संस्कृति और इतिहास के वारिस हैं, फिर भी राजनीतिक दीवार उन्हें अलग रखती है. कई परिवार आज भी विभाजन की पीड़ा झेल रहे हैं.
15 अगस्त की तारीख दोनों देशों में आजादी के दिन के रूप में मनाई जाती है, लेकिन यह दिन उन्हें उस ऐतिहासिक मोड़ की भी याद दिलाता है जिसने उनके भूगोल और भविष्य को हमेशा के लिए बदल दिया. बिल्कुल भारत की तरह… दिन आजादी का वही और फिर बंटवारा.
वैसे, 15 अगस्त को भारत और कोरिया के अलावा, लिचटेंस्टीन, कांगो रिपबल्कि और बहरीन भी आजाद हुए थे.
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