भारत और इजरायल मिलकर बनाएंगे दुनिया का पहली ऐसी हथियार प्रणाली, थर-थर कांपेगा पाकिस्तान

India Israel Arbel computerised weapon system: भारत और इजरायल की फर्म मिलकर दुनिया की पहली Arbel कंप्यूटरीकृत हथियार प्रणाली बनाने के लिए बातचीत की टेबल पर हैं. यह Arbel सिस्टम हथियार की हलचल और ट्रिगर की स्थिति की निगरानी करती है ताकि उपयोगकर्ता की सामरिक स्थिति और निशानेबाजी के पैटर्न को पहचान सके. यह तभी गोलियां छोड़ता है, जब लक्ष्य पर लगने की संभावना सबसे अधिक हो.

India Israel Arbel computerised weapon system: भारत और इजराइल वेपन इंडस्ट्रीज (IWI) ने भारतीय बलों के लिए क्रांतिकारी Arbel कंप्यूटरीकृत हथियार प्रणाली के एकीकरण की संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी है. IWI विश्व की अग्रणी छोटे हथियारों की निर्माता कंपनी है. IWI द्वारा निर्मित Arbel को दुनिया की पहली पूरी तरह कंप्यूटरीकृत छोटे हथियारों की फायर-कंट्रोल प्रणाली बताया जा रहा है. इसे जटिल युद्धक्षेत्र स्थितियों में सैनिकों की सटीकता, मारक क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. Arbel प्रणाली उन्नत सेंसर, रियल-टाइम बैलिस्टिक कंप्यूटेशन और टारगेट अधिग्रहण क्षमता का उपयोग करती है, जिससे सैनिक विभिन्न युद्ध परिवेशों में अधिक हिट-प्रायिकता हासिल कर सकें. भारत की पाकिस्तान से 3323 किमी लंबी सीमा है. इनमें से ज्यादातर इलाकों में बाड़ नहीं लगी है. ऐसे में सीमा सुरक्षा बल तैनात रहती है. इन नए हथियारों से भारत को सीमा सुरक्षा में और बढ़त मिलेगी.  

Arbel सिस्टम हथियार की हलचल और ट्रिगर की स्थिति की निगरानी करती है ताकि उपयोगकर्ता की सामरिक स्थिति और निशानेबाजी के पैटर्न को पहचान सके. कुछ मिलीसेकंड में इसका MEMS (Micro Electro Mechanical System) एल्गोरिदम सर्वोत्तम फायर समाधान तय कर देता है. इस हथियार से पहली गोली चलने के बाद जब ट्रिगर दबा कर रखा जाता है, तो Arbel शूटर के व्यवहार का विश्लेषण करता है और बाद की गोलियां केवल तब छोड़ता है जब लक्ष्य पर लगने की संभावना अधिक हो. इस प्रणाली को किसी भी छोटे हथियार प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा सकता है और इसे कार्य करने के लिए किसी समर्पित ऑप्टिकल घटक की आवश्यकता नहीं होती.

भारत ने IWI से खरीदे हैं कई हथियार

भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध काफी गहरे हो रहे हैं.  पिछले वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों और सुरक्षा बलों ने IWI के भी कई हथियार खरीदे हैं. इनमें Tavor TAR-21 असॉल्ट राइफल और उसका संस्करण IWI X95 भी शामिल हैं. इसके साथ ही Galil Sniper Rifle परिवार की स्नाइपर राइफलें और Negev NG-7 लाइट मशीन गन जैसी हल्की मशीनगनों को भी भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए सेना में शामिल किया है. हाल के वर्षों में सीमा पर अग्रिम मोर्चे और अर्धसैनिक बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए हजारों नेगेव मशीनगनों के लिए अनुबंध भी किए गए हैं.

ARBEL सिस्टम एकीकरण को लेकर शुरुआती चर्चा में बातचीत

IWI के सीईओ शुकी श्वार्ट्ज ने पुष्टि की कि बातचीत जारी है. उन्होंने कहा कि हम अब भारत में ARBEL सिस्टम के एकीकरण को लेकर शुरुआती बातचीत और चर्चाओं में हैं. श्वार्ट्ज ने भारत और IWI के बीच मजबूत होती साझेदारी पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में हम भारत के साथ विभिन्न रक्षा संगठनों को सुसज्जित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और इन वर्षों में हमने उल्लेखनीय वृद्धि देखी है. हम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को अपनाने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक होने पर गर्व महसूस करते हैं, जिसने हमें भारत में बड़ी मात्रा और बड़ा बाजार हिस्सा हासिल करने में सक्षम बनाया है. उन्होंने यह भी बताया कि IWI भारत में पहले से ही बैरल का उत्पादन कर रहा है और भारत की आवश्यकताओं के अनुसार गहन प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है.

भारत इजरायल रक्षा संबंध हैं मजबूत

भारत ने बीते कुछ अभियानों में इजरायली हथियारों का बखूबी इस्तेमाल किया है. पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने में स्पाइस मिसाइलों ने सटीकता से निशाना बनाया. इसके साथ ही भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हेरॉन ड्रोन का काफी अंदर तक इस्तेमाल किया. भारत को इजरायल का साथ लगभग हर सैन्य झड़पों में मिला है. इसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश अब इस नए हथियार समझौतों पर आगे बढ़ रहे हैं. 

प्रभात खबर पॉडकास्ट में रवि शास्त्री 7 दिसंबर को.

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