नेपाल की खौफनाक तबाही का लड़की ने बताया आंखों देखा हाल, बोली- कुछ घंटे और रुकते तो हम भी बन जाते तबाही का शिकार

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर एक लड़की ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का मार्मिक वर्णन किया है. उसने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा, यात्री ने कहा कि यात्रा के शुरुआत में हम जहां घंटों खड़े थे आज उसका नामों निशान नहीं है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई एक लड़की ने नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ का आंखों देखा हाल बताया है. लड़की ने बताया कि इस बाढ़ का मंजर देखकर उसका मन बेहद दुखी है. उसने कहा कि इतनी बड़ी तबाही उसने अपने जीवन में कभी नहीं देखी.

कैलाश के सामने जन्मदिन और तबाही का मंजर

लड़की ने वीडियो में बताया कि वह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर है और उसके पीछे पवित्र कैलाश पर्वत दिखाई दे रहा है. उसने कहा कि आज यानी 28 अगस्त को उसका जन्मदिन है. इसी दौरान उसने नेपाल में हुई तबाही को याद करते हुए वहां की डरावनी स्थिति के बारे में बताया.

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जहां घंटों खड़े थे, आज वहां कुछ भी नहीं

लड़की ने बताया कि यात्रा की शुरुआत में जिस जगह वे लोग घंटों खड़े रहे थे, आज उस जगह का नामोनिशान तक नहीं बचा है. उसने कहा कि तबाही का मंजर देखकर यकीन करना मुश्किल है कि जहां कभी लोग और घर नजर आते थे, वहां आज कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा.

नदी के दोनों ओर थे सैकड़ों घर

लड़की ने बताया कि जिस नदी में बाढ़ आई है, उसके दोनों ओर सैकड़ों लोगों के घर थे. ये घर शायद छोटे-छोटे और साधारण रहे होंगे, जहाँ लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी रहे थे. सुबह की चाय से लेकर शाम के खाने तक, उनकी अपनी दिनचर्या रही होगी. यह देखकर यकीन नहीं होता कि कुछ समय पहले इसी नदी के दोनों किनारों पर सैकड़ों घर बसे हुए थे. उसने बताया कि उसने रास्ते में स्थानीय लोगों से बातचीत की और वहां के हालात को समझने की कोशिश की. लेकिन अब हालात इतने बदल चुके हैं कि न वह रास्ता नजर आ रहा है, न लोग और न ही नदी का पानी पहले जैसा दिखाई दे रहा है.

एक दिन लेट होते तो हम भी बाढ़ में फंस जाते

लड़की ने बताया कि अगर उनकी यात्रा एक दिन लेट हो जाती, तो शायद वे भी इस भयानक बाढ़ में फंस जाते. जैसे ही वे थोड़ा आगे बढ़े, उन्हें पता चला कि उनके पीछे आई तबाही ने सब कुछ बर्बाद कर दिया था.

अब भी कई भारतीय लापता होने की बात

लड़की ने बताया कि इस त्रासदी के बाद अब भी कई भारतीयों के लापता होने की खबर है. नेपाल में आई इस तबाही ने कई परिवारों को बहुत ज़्यादा दुख में डाल दिया है. कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान सामने आए इन हालात ने वहां की तबाही की भयावह तस्वीर को और करीब से दिखाया है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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